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सांप ने डसीं खुशियां: कमरे का दरवाजा खोलते ही किशोरी को डसा, अस्पताल के बाद ओझा के चक्कर में गंवाई जान

अलीगढ़ में एक बेहद दुखद घटना सामने आई है, जहां महज एक पल की चूक ने हंसते-खेलते परिवार की खुशियां छीन लीं। खाना खाकर सोने के लिए अपने कमरे में गई एक किशोरी को सांप ने अपना शिकार बना लिया। इस घटना के बाद परिवार में कोहराम मचा है और स्थानीय लोग भी सदमे में हैं।

क्या थी पूरी घटना?

पीड़ित किशोरी रात के समय अपना खाना खाकर कमरे में सोने के लिए गई थी। जैसे ही उसने कमरे का दरवाजा खोला, अंधेरे में छिपे सांप ने उस पर हमला कर दिया। किशोरी के शोर मचाने पर परिजन मौके पर पहुंचे, जहां उन्हें सांप के डसने का पता चला।

अस्पताल के बजाय ओझाओं के पास क्यों गए?

सांप काटने की खबर मिलते ही परिजन घबरा गए। शुरुआती प्राथमिक उपचार के लिए उसे अस्पताल तो ले जाया गया, लेकिन बदकिस्मती से कुछ लोगों के बहकावे में आकर परिजन किशोरी को अस्पताल में भर्ती रखने के बजाय ‘बायगीरों’ (झाड़-फूंक करने वालों) के पास ले गए। अंधविश्वास के इस फेर में कीमती समय बर्बाद हो गया और किशोरी की स्थिति लगातार बिगड़ती गई।

मायने और प्रभाव

यह घटना एक कड़वी सच्चाई को सामने लाती है कि आज के आधुनिक युग में भी ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में अंधविश्वास कितनी गहरी जड़ें जमाए हुए है।

  • समय की अहमियत: सांप के काटने पर हर मिनट कीमती होता है। एंटी-वेनम ही एकमात्र इलाज है, झाड़-फूंक नहीं।
  • जागरूकता का अभाव: किसी भी तरह के विषैले जीव के काटने पर तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल या जिला चिकित्सालय ही जाना चाहिए।
  • इलाज का विकल्प: ओझाओं के चक्कर में पड़ने का मतलब सीधे तौर पर मौत को दावत देना है।

इस दुखद घटना से सीख लेते हुए यह जरूरी है कि लोग ऐसे मामलों में विज्ञान और डॉक्टर्स पर भरोसा करें, न कि पुरानी और घातक प्रथाओं पर। समय रहते सही इलाज मिल जाए तो सांप के डसने पर जान बचाना संभव है।

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