कानपुर के नौबस्ता इलाके में एक दर्दनाक हादसा हुआ, जिसने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया है। अपनी फसल की देखभाल करने के लिए घर से निकले एक 69 वर्षीय बुजुर्ग किसान की आवारा सांड़ के हमले में मौत हो गई। इस घटना ने एक बार फिर खुले में घूम रहे गोवंश की समस्या को लेकर स्थानीय लोगों के गुस्से को बढ़ा दिया है।
सुबह की सैर बनी आखिरी सफर
लालपुर गांव के रहने वाले उमाशंकर साहू अपनी खेती-बाड़ी पर निर्भर थे। शनिवार तड़के जब वे अपनी बटाई की फसल देखने खेतों की ओर निकले, तो उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि यह उनकी आखिरी सुबह होगी। रास्ते में उन्हें गोवंश के एक झुंड ने घेर लिया। अचानक एक आक्रामक सांड़ ने उन पर हमला कर दिया और उन्हें पटक-पटक कर बुरी तरह घायल कर दिया।
ग्रामीणों की मदद भी नहीं बचा सकी जान
बुजुर्ग की चीख-पुकार सुनकर आसपास काम कर रहे ग्रामीण विश्राम पासवान और अन्य लोग लाठी-डंडा लेकर दौड़ पड़े। काफी मशक्कत के बाद उन्होंने सांड़ को खदेड़ा, लेकिन तब तक उमाशंकर गंभीर रूप से जख्मी हो चुके थे। परिजन उन्हें तुरंत अस्पताल ले गए, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। महाराजपुर के ड्योढ़ी घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया।
मायने और प्रभाव: क्यों गंभीर है यह मुद्दा?
यह घटना केवल एक परिवार का नुकसान नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश के कई ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों की एक बड़ी समस्या को दर्शाती है:
- आवारा पशुओं का खतरा: सड़कों और खेतों में घूमते सांडों की वजह से किसानों और राहगीरों में डर का माहौल है।
- प्रशासनिक विफलता: बार-बार शिकायत के बावजूद गोवंश प्रबंधन की व्यवस्था धरातल पर कारगर साबित नहीं हो रही है।
- ग्रामीण अर्थव्यवस्था: किसान अपनी फसलों की सुरक्षा के लिए जान जोखिम में डालने को मजबूर हैं, जिसका सीधा असर उनकी जीविका पर पड़ रहा है।
विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने पीड़ित परिवार से मिलकर उन्हें हर संभव मदद का भरोसा दिलाया है, लेकिन सवाल यह है कि आखिर कब तक किसान आवारा पशुओं के डर के साये में खेती करेंगे? प्रशासन को अब केवल मुआवजा नहीं, बल्कि ठोस समाधान की दिशा में कदम उठाने होंगे।



