चंडीगढ़ की सरहद पर क्यों मचा है बवाल?
चंडीगढ़ और मोहाली के बॉर्डर पर पिछले कुछ दिनों से तनाव का माहौल है। सिख कैदियों की रिहाई की मांग को लेकर प्रदर्शनकारी और पुलिस आमने-सामने हैं। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि भीड़ को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षा बलों को पहली बार ड्रोन के जरिए आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े।
क्या है पूरा मामला?
इस पूरे आंदोलन की जड़ में वे सिख कैदी हैं जो अपनी सजा पूरी होने के बाद भी जेलों में बंद हैं। इसमें सबसे चर्चित नाम पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह हत्याकांड के दोषी जगतार सिंह हवारा का है। कौमी इंसाफ मोर्चा लंबे समय से इन कैदियों की रिहाई के लिए मोर्चा खोले हुए है।
जगतार सिंह हवारा का स्टैंड क्या है?
- हवारा ने स्पष्ट कर दिया है कि वे पैरोल पर बाहर नहीं आएंगे।
- जेल के अंदर से जारी एक संदेश में उन्होंने साफ कहा कि अगर उनकी मां का निधन भी हो जाए, तो भी वे पैरोल स्वीकार नहीं करेंगे।
- उन्होंने अपने समर्थकों से 15 अगस्त के प्रस्तावित मार्च को पूरी तरह शांतिपूर्ण रखने की अपील की है।
मायने और प्रभाव
यह मुद्दा केवल कैदियों की रिहाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पंजाब की राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। जब राज्य के राज्यपाल खुद मानवीय आधार पर पैरोल की सिफारिश कर रहे हों और दूसरी तरफ सड़कों पर आंसू गैस के गोले चल रहे हों, तो यह साफ है कि संवाद की कमी कहीं न कहीं बनी हुई है। आम जनता के लिए यह चिंता का विषय है क्योंकि इस तरह के प्रदर्शनों से शहर की शांति और यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा जाती है। सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच भरोसे की कमी का खामियाजा अंततः पंजाब के आम नागरिकों को ही भुगतना पड़ रहा है।



