कानपुर में रसूख का रौब दिखाकर आम लोगों को ठगने वाले एक शातिर हिस्ट्रीशीटर का खेल आखिरकार खत्म हो गया है। सीसामऊ पुलिस ने गुरुवार को रजत वर्मा नाम के एक अपराधी को गिरफ्तार किया है, जो खुद को सूबे के एक मंत्री का पीआरओ (जनसंपर्क अधिकारी) बताकर लोगों से वसूली करता था।
क्या है पूरा मामला?
पीड़ित रोमी, जो रेउना के ग्राम शाखाजनवारा का रहने वाला है, उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। रोमी के परिवार में जमीन या आपसी विवाद को लेकर कुछ समय पहले थाना रेउना में मुकदमा दर्ज हुआ था। इसी बीच, आरोपी रजत वर्मा ने खुद को रसूखदार बताते हुए परिवार को फंसाने की कोशिश की।
रजत वर्मा ने पीड़ित के मामा सुमित को झांसे में लिया और पुलिस विभाग में अच्छी पकड़ होने का दावा किया। उसने मंत्री का पीआरओ बनकर पुलिस कार्रवाई में ‘सेटिंग’ कराने के एवज में 20 हजार रुपये की मांग की। डर के साये में जी रहे परिवार ने 10 हजार रुपये उसे दे भी दिए, लेकिन काम नहीं हुआ।
छह महीने से चल रहा था फरार
पैसे लेने के बाद आरोपी गायब हो गया और पिछले छह महीने से पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ रहा था। कानपुर पुलिस ने इस अपराधी पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित कर रखा था।
सीसामऊ थाना प्रभारी राकेश सिंह ने बताया कि गुरुवार को मुखबिर की सूचना पर उसे जेके जूट मिल की दीवार के पास से धर दबोचा गया। तलाशी के दौरान उसके पास से एक अवैध तमंचा और कारतूस भी बरामद किए गए हैं।
मायने और प्रभाव: आम जनता को क्या सीख मिलती है?
यह घटना दिखाती है कि कैसे शातिर अपराधी सरकारी नाम और पद का दुरुपयोग करके आम जनता की मजबूरी का फायदा उठाते हैं।
- सावधानी बरतें: किसी भी सरकारी काम के लिए सीधे विभागीय दफ्तर जाएं, न कि किसी बिचौलिए या खुद को ‘पीआरओ’ बताने वाले व्यक्ति पर भरोसा करें।
- रसूख के झांसे में न आएं: अक्सर ऐसे ठग प्रभावशाली लोगों के नाम का इस्तेमाल करते हैं ताकि पीड़ित डर जाए। किसी भी लेनदेन से पहले उसकी आधिकारिक पुष्टि जरूर करें।
- पुलिस की सक्रियता: एक हिस्ट्रीशीटर पर इनाम घोषित कर उसे जेल भेजना कानपुर पुलिस की सख्ती को दर्शाता है, लेकिन जनता की जागरूकता ही ऐसी ठगी रोकने का सबसे बड़ा हथियार है।




