क्या है कन्नौज नवोदय का पूरा मामला?
कन्नौज के अनौगी स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय में उस समय हड़कंप मच गया जब 10वीं से 12वीं तक के 95 छात्रों ने हॉस्टल में खुद को बंद कर भूख हड़ताल शुरू कर दी। छात्रों का आरोप है कि उन्हें लंबे समय से घटिया दर्जे का भोजन परोसा जा रहा था, जो सेहत के लिए भी सुरक्षित नहीं है।
इतना ही नहीं, छात्रों ने यह भी गंभीर आरोप लगाए कि विद्यालय के कुक और कुछ शिक्षकों द्वारा उनके साथ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया जाता है। छात्रों का गुस्सा तब और भड़क गया जब उन्होंने दावा किया कि विद्यालय प्रशासन ने परिसर में ‘भारत माता की जय’ जैसे नारों पर भी पाबंदी लगाने की कोशिश की।
प्रशासन की नींद खुली, DM ने खुद खाया खाना
हंगामे की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन में अफरा-तफरी मच गई। देर शाम जिलाधिकारी आशुतोष मोहन अग्निहोत्री विद्यालय पहुंचे। छात्रों से बातचीत के दौरान उन्होंने न केवल उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना, बल्कि हॉस्टल की व्यवस्थाओं का जायजा भी लिया।
स्थिति को सामान्य करने के लिए डीएम आशुतोष मोहन अग्निहोत्री ने खुद मैस में जाकर छात्रों के साथ भोजन किया, जिसके बाद छात्रों ने अपनी हड़ताल समाप्त करने का निर्णय लिया। डीएम ने स्वीकार किया कि प्राथमिक जांच में हॉस्टल और भोजन व्यवस्था में कई खामियां सामने आई हैं, जिस पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
मायने और प्रभाव: अभिभावकों के लिए क्यों जरूरी है यह?
- सुविधाओं की अनदेखी: यह घटना दिखाती है कि कैसे सरकारी आवासीय विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव और प्रबंधन की लापरवाही छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर सकती है।
- छात्रों का मनोबल: अपनी आवाज़ उठाने वाले इन छात्रों ने यह साबित कर दिया है कि नई पीढ़ी अब गलत के खिलाफ चुप नहीं रहने वाली।
- जवाबदेही तय होना जरूरी: क्या सिर्फ आश्वासन काफी है? प्रशासन को अब यह सुनिश्चित करना होगा कि दोषी पाए गए स्टाफ पर अनुशासनात्मक कार्रवाई हो ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

