बरेली में दहला देने वाली घटना
बुधवार की दोपहर बरेली कलेक्ट्रेट के मुख्य गेट पर उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक मां और बेटी ने खुद को आग लगाने की कोशिश की। दोनों महिलाएं अपने साथ पेट्रोल की बोतल लेकर पहुंची थीं और गेट के सामने आते ही उन्होंने खुद पर ज्वलनशील पदार्थ उड़ेल लिया।
वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों और पुलिस बल की मुस्तैदी से एक बड़ा हादसा टल गया। पुलिस ने फुर्ती दिखाते हुए पेट्रोल की बोतलें छीन लीं और महिलाओं को हिरासत में ले लिया। मौके पर मौजूद लोग इस घटना को देख सन्न रह गए।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, पीड़ित महिलाएं काफी समय से एक प्लॉट पर अवैध कब्जे को लेकर परेशान थीं। उनका आरोप है कि दबंगों ने उनकी जमीन पर कब्जा कर रखा है और कई बार गुहार लगाने के बाद भी प्रशासन ने उनकी सुनवाई नहीं की।
- पीड़ितों का आरोप: प्रशासन और स्थानीय पुलिस पर कार्रवाई न करने का गंभीर आरोप।
- विरोध का तरीका: लगातार अनदेखी से तंग आकर महिलाओं ने आत्मदाह जैसा कदम उठाने का फैसला किया।
- मौके पर स्थिति: पुलिस ने तत्काल प्रभाव से सुरक्षा कड़ी कर दी है और दोनों महिलाओं को पूछताछ के लिए थाने ले जाया गया है।
मायने और प्रभाव
यह घटना बरेली प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। जब जनता को अपनी फरियाद सुनाने के लिए कलेक्ट्रेट जैसे सरकारी दफ्तर के गेट पर पेट्रोल छिड़कना पड़े, तो यह शासन-प्रशासन के ‘जनसुनवाई’ के दावों की पोल खोलता है।
आम आदमी के लिए इसका सीधा संदेश यह है कि न्याय पाने के लिए उसे कितनी जद्दोजहद करनी पड़ती है। अगर पुलिस-प्रशासन समय रहते जमीन विवादों और अवैध कब्जों पर सख्त कार्रवाई करे, तो ऐसे जानलेवा हालातों से बचा जा सकता है। अब सवाल यह है कि क्या इन महिलाओं की फरियाद सुनी जाएगी या मामला फिर ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।

