क्या आपने कभी रक्तदान किया है? अगर पहली बार रक्तदान के बाद आपको चक्कर आए या घबराहट महसूस हुई, तो आप अकेले नहीं हैं। लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) की एक हालिया रिसर्च ने उन कारणों से पर्दा उठाया है, जिनकी वजह से लोग दोबारा रक्तदान करने से कतराने लगते हैं।
क्यों थम जाते हैं कदम?
KGMU की यह स्टडी ‘बायोइंफॉर्मेशन’ जर्नल में प्रकाशित हुई है। साल 2025 के दौरान 73,000 से अधिक रक्तदाताओं पर किए गए इस अध्ययन में एक बड़ा खुलासा हुआ है। रिसर्च के अनुसार, जो लोग पहली बार रक्तदान करने आते हैं, उनमें से बड़ी संख्या में लोग किसी न किसी वजह से दोबारा ब्लड बैंक का रुख नहीं करते।
89 फीसदी लोगों ने बनाई दूरी
चौंकाने वाली बात यह है कि जिन लोगों को पहली बार रक्तदान करने के बाद चक्कर आना, कमजोरी या बेहोशी का सामना करना पड़ा, उनमें से 89 फीसदी लोगों ने दोबारा कभी रक्तदान न करने की कसम खा ली। डर और झिझक उनके जहन में इस कदर बैठ गई कि वे दोबारा दानवीर बनने की हिम्मत नहीं जुटा सके।
- डर का मनोवैज्ञानिक असर: पहली बार का अनुभव ही तय करता है कि व्यक्ति दोबारा आएगा या नहीं।
- शारीरिक प्रतिक्रिया: चक्कर आने जैसे अनुभव से लोग भविष्य के लिए डर जाते हैं।
- अस्पताल का माहौल: पहली बार आने वालों के लिए सही काउंसिलिंग की कमी भी एक बड़ी वजह है।
मायने और प्रभाव
यह अध्ययन सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद गंभीर है। भारत जैसे देश में जहां रक्तदान की कमी से अक्सर अस्पतालों में जान पर बन आती है, वहां ‘फर्स्ट टाइम डोनर्स’ का दोबारा न आना एक बड़ी समस्या है। अगर डोनर को रक्तदान से पहले और बाद में सही गाइडेंस मिले, उनके डर को कम किया जाए और हाइड्रेशन पर ध्यान दिया जाए, तो यह आंकड़ा बदला जा सकता है। यह सिर्फ एक मेडिकल रिपोर्ट नहीं, बल्कि समाज के लिए एक संदेश है कि रक्तदान को लेकर न केवल जागरूकता चाहिए, बल्कि डोनर्स को सहज महसूस कराना भी उतना ही जरूरी है।



