यूपी की राजनीति में इन दिनों विकास के दावों और हकीकत के बीच की खाई चौड़ी होती जा रही है। हाल ही में कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे का एक हिस्सा धंसने की खबर ने न केवल जनता को हैरान किया है, बल्कि विपक्षी दलों को सरकार पर हमला करने का बड़ा मौका दे दिया है। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने इस घटना को भ्रष्टाचार का जीता-जागता सबूत करार दिया है।
निर्माण की गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल
कानपुर और लखनऊ को जोड़ने वाली इस महत्वाकांक्षी सड़क परियोजना का धंसना कई बड़े सवाल खड़े करता है। जिस एक्सप्रेसवे को सफर को सुगम बनाने के लिए बनाया गया था, वह निर्माण के कुछ ही समय बाद अपनी गुणवत्ता पर खुद ही सवालिया निशान लगा रहा है। अखिलेश यादव का आरोप है कि इसमें बड़े पैमाने पर धांधली हुई है और सरकारी धन का बंदरबांट किया गया है।
‘नई पीढ़ी है भाजपा से नाराज’
अखिलेश यादव ने सिर्फ सड़क की गुणवत्ता पर ही उंगली नहीं उठाई, बल्कि इसे भाजपा की कार्यशैली से जोड़ दिया है। उन्होंने कहा, ‘प्रदेश की नई पीढ़ी अब भाजपा सरकार के भ्रष्टाचार और खोखले दावों से पूरी तरह नाराज हो चुकी है। यह केवल एक सड़क नहीं, बल्कि जनता के भरोसे का धंसना है।’ उनका मानना है कि आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की जनता इस लापरवाही का जवाब जरूर देगी।
मायने और प्रभाव
- आम जनता पर असर: ऐसी घटनाएं न केवल दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ाती हैं, बल्कि सरकारी खजाने का भारी नुकसान भी करती हैं जिसका बोझ अंततः जनता पर ही पड़ता है।
- राजनीतिक प्रभाव: राज्यपाल की ओर से भी गोरखपुर और अन्य जिलों में भ्रष्टाचार को लेकर की गई टिप्पणियों के बाद, सरकार पर विपक्षी दबाव दोगुना हो गया है।
- विकास का सच: यह मुद्दा अब आगामी चुनावों में एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनने की राह पर है, जहाँ ‘विकास बनाम भ्रष्टाचार’ का नैरेटिव मुख्य केंद्र रहेगा।
फिलहाल, सरकार की तरफ से इस पर कोई बड़ी प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सोशल मीडिया से लेकर ज़मीनी स्तर तक लोग एक्सप्रेसवे की तस्वीरें शेयर कर सरकार से जवाब मांग रहे हैं।

