हाथरस में एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसे देखकर हर इंसान का सिर शर्म से झुक जाए। एक होमगार्ड के अंतिम संस्कार के दौरान जब आसमान से बरसी आफत ने अंतिम विदाई का रास्ता रोका, तो परिजन मदद की उम्मीद में प्रशासन को देखते रह गए। अंत में, अपनों ने खुद ही तिरपाल तानकर चिता को भीगने से बचाया।
सिस्टम की लापरवाही का वीभत्स चेहरा
यह घटना हाथरस जंक्शन क्षेत्र की है, जहाँ एक होमगार्ड की मौत के बाद उनके अंतिम संस्कार के लिए कोई सुरक्षित जगह नसीब नहीं हुई। भारी बारिश के बीच जब शवदाह गृह की छतें जवाब दे गईं, तो शोक में डूबे परिजनों को मजबूरन तिरपाल सहारा बनाना पड़ा। तस्वीरें बयां कर रही हैं कि किस तरह लोग हाथ में तिरपाल थामे खड़े रहे ताकि अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी हो सके।
क्यों बार-बार हो रहा ऐसा?
यह पहली बार नहीं है जब जिले में मौत के बाद भी सम्मानजनक विदाई नहीं मिल सकी।
- पिछले सप्ताह ही हाथरस जंक्शन के बरौली गांव में ऐसी ही घटना हुई थी।
- इससे पहले 9 जुलाई को सोखना गांव में दो महिलाओं का अंतिम संस्कार तिरपाल के साये में हुआ था।
लगातार सामने आ रही ये घटनाएं दावों और हकीकत के बीच के अंतर को साफ दिखा रही हैं।
मायने और प्रभाव
इस घटना ने सिस्टम की संवेदनहीनता की पोल खोल दी है। आखिर क्या कारण है कि श्मशान घाटों पर बुनियादी सुविधाएं तक नहीं हैं? एक सुरक्षाकर्मी, जिसने अपना पूरा जीवन दूसरों की सेवा में लगा दिया, उसे अंतिम समय में छत भी न मिल सके, यह समाज और प्रशासन के लिए बड़ा सवाल है। अगर जिम्मेदार विभाग श्मशान घाटों के रख-रखाव में नाकाम रहते हैं, तो जनता का सिस्टम पर भरोसा उठना लाजिमी है।



