आगरा को ‘स्मार्ट सिटी’ का तमगा मिले काफी समय हो चुका है, लेकिन हकीकत क्या है? सिर्फ दो घंटे की झमाझम बारिश ने पूरे शहर की पोल खोलकर रख दी है। प्रमुख सड़कों से लेकर रिहायशी इलाकों तक, हर जगह पानी का कब्जा है और आम आदमी अपनी जान जोखिम में डालकर निकलने को मजबूर है। नगर निगम के तमाम दावे और वादे एक बार फिर बारिश के पानी में बहते नजर आए।
शहर के उन 42 इलाकों का हाल, जो हर बारिश में बनते हैं तालाब
जब भी आसमान से पानी बरसता है, आगरा के कुछ इलाके ऐसे हैं जहाँ लोगों की धड़कनें बढ़ जाती हैं। नगर निगम की फाइलों में विकास की बातें तो बहुत हैं, लेकिन धरातल पर स्थिति गंभीर बनी हुई है। फतेहाबाद रोड से लेकर दयालबाग और शास्त्रीपुरम तक, शहर का बड़ा हिस्सा जलभराव की चपेट में है।
इन इलाकों में जलभराव की समस्या सबसे अधिक है:
- खेरिया मोड़: एयरफोर्स स्टेशन के पास डेढ़ फीट पानी ने बिजली के कनेक्शन बॉक्स को खतरे में डाल दिया है, जिससे करंट का बड़ा डर बना हुआ है।
- कैंट स्टेशन रोड: सुल्तानपुरा से स्टेशन तक की सड़क तालाब बन गई है, जिससे यात्रियों को भारी फजीहत का सामना करना पड़ा।
- उखर्रा रोड: यहाँ की गलियां ऊंची होने के कारण 25 से ज्यादा घरों में पानी घुस गया, जिससे लोगों का जनजीवन अस्त-व्यस्त है।
- आवास विकास कॉलोनी: नाले चोक होने के कारण सेंट्रल पार्क के पास घंटों जलभराव बना रहा।
मायने और प्रभाव: आम जनता पर असर
इस स्थिति का सीधा असर आगरा की अर्थव्यवस्था और आम आदमी की सुरक्षा पर पड़ता है। जब शहर की मुख्य धमनियां जलमग्न हो जाती हैं, तो ट्रैफिक जाम के साथ-साथ दुर्घटनाओं का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। विशेष रूप से बिजली के तारों और बॉक्स के पास जलभराव ‘मौत को दावत’ देने जैसा है।
नगर निगम की 73 नए नालों की प्रस्तावित योजना पर सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि जब तक पुरानी ड्रेनेज सिस्टम की सफाई और अतिक्रमण की समस्या का हल नहीं निकलेगा, तब तक शहर को इन 42 इलाकों के ‘तालाब’ बनने से कोई नहीं बचा सकता। स्मार्ट सिटी केवल चौड़ी सड़कों से नहीं, बल्कि बेहतर ड्रेनेज मैनेजमेंट और समय पर किए गए सुधारों से बनती है, जो फिलहाल आगरा में नदारद दिख रहा है।



