प्रयागराज का माफिया अतीक अहमद का परिवार एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन इस बार वजह कोई अपराध नहीं बल्कि एक और मौत है। अतीक, अशरफ और असद की दुखद मौत के बाद, अब परिवार के एक और सदस्य आबान के निधन ने पूरे इलाके में सन्नाटा खींच दिया है।
क्या शाइस्ता परवीन आएंगी सामने?
अतीक की पत्नी शाइस्ता परवीन पिछले ढाई साल से पुलिस और एजेंसियों की नजरों से बचकर फरार चल रही हैं। बेटे असद के एनकाउंटर के वक्त भी वह सामने नहीं आ सकी थीं, जिससे उनके छिपने की जगह को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं।
अब जब आबान के निधन के बाद जनाजे की रस्मों की तैयारी है, तो हर किसी की नजरें इसी बात पर टिकी हैं कि क्या एक मां अपनी ममता के आगे कानून का डर छोड़ देगी? क्या वह बेटे को आखिरी विदाई देने के लिए सार्वजनिक रूप से सामने आएगी?
कानूनी और मानवीय दुविधा
- कानूनी घेरा: पुलिस की टीमें लगातार शाइस्ता की लोकेशन ट्रैक कर रही हैं, और जनाजे का स्थान उनके लिए एक बड़ा जाल हो सकता है।
- सुरक्षा का डर: शाइस्ता के वकील और करीबी इस बात से आशंकित हैं कि अगर वह बाहर आती हैं, तो पुलिस तुरंत उन्हें गिरफ्तार कर लेगी।
- भावनात्मक दबाव: एक मां के लिए अपने बच्चे के अंतिम संस्कार से दूर रहना किसी भी सामान्य स्थिति से कहीं ज्यादा भारी पड़ता है।
मायने और प्रभाव
यह घटना केवल एक परिवार का निजी दुख नहीं है, बल्कि यह यूपी की कानून-व्यवस्था के इतिहास का एक संवेदनशील पन्ना है। अतीक अहमद का ‘साम्राज्य’ ढहने के बाद जिस तरह से परिवार के सदस्य एक-एक करके दुनिया से जा रहे हैं, वह प्रदेश की राजनीति और अपराध जगत के लिए एक बड़ा संकेत है।
आम जनता के लिए यह सवाल अहम है कि क्या शाइस्ता का सामने आना केवल एक अंतिम संस्कार होगा, या यह उस लंबे चले आ रहे ‘फरार अध्याय’ का अंत साबित होगा? फिलहाल, प्रयागराज की गलियों में बस एक ही चर्चा है—क्या मां का कलेजा कानून के पहरों को तोड़ पाएगा?

