कानपुर के चकेरी इलाके में रहने वाले शिक्षक शरद चंद्र त्रिपाठी के घर हुई सनसनीखेज लूट की वारदात के बाद से दहशत का माहौल था। बुधवार देर रात पुलिस और बदमाशों के बीच हुई जबरदस्त मुठभेड़ के बाद अब इलाके ने राहत की सांस ली है। इस मुठभेड़ में शिक्षक के घर को अपना निशाना बनाने वाले दो कुख्यात बदमाश पुलिस की गोली लगने से घायल हो गए हैं।
साले की गद्दारी और लूट की पूरी साजिश
जांच में खुलासा हुआ कि इस लूट के पीछे कोई बाहरी नहीं, बल्कि अपनों का ही हाथ था। पुलिस ने मामले के मास्टरमाइंड प्रशांत उर्फ मोनू को सबसे पहले गिरफ्तार किया, जो पीड़ित शिक्षक का ही साला है। मोनू ने ही अपने जीजा के घर की पूरी रेकी की थी और अपने चार साथियों के साथ मिलकर लूट का खूनी खेल रचा था।
अहिरवां में हुई आमने-सामने की टक्कर
अपर पुलिस आयुक्त डॉ. विपिन ताडा ने बताया कि खुफिया सूचना के आधार पर पुलिस ने अहिरवां इलाके में बदमाशों की घेराबंदी की। पकड़े गए बदमाशों की पहचान उन्नाव निवासी शफीक अहमद और चकेरी के कमल के रूप में हुई है। जब पुलिस ने इन्हें आत्मसमर्पण के लिए कहा, तो बदमाशों ने सीधे फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में दोनों के पैरों में गोली लगी और वे मौके पर ही ढेर हो गए।
पुलिस के हत्थे चढ़े लुटेरे, बाकी की तलाश जारी
- बरामदगी: बदमाशों के पास से वारदात में इस्तेमाल की गई बाइक और अवैध तमंचे बरामद हुए हैं।
- फरार आरोपी: पुलिस अब हिस्ट्रीशीटर रफीक और विजय की तलाश में ताबड़तोड़ दबिश दे रही है।
- इलाज: घायल बदमाशों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
मायने और प्रभाव
कानपुर पुलिस की यह त्वरित कार्रवाई आम जनता में सुरक्षा का भरोसा बहाल करने के लिए जरूरी थी। एक शिक्षक के घर को निशाना बनाना यह दर्शाता है कि अपराधी अब किसी भी हद तक गिरने को तैयार हैं। पुलिस की यह ‘एनकाउंटर’ वाली सख्ती उन अपराधियों के लिए एक साफ चेतावनी है जो शहर की शांति भंग करने की सोच रहे हैं। स्थानीय लोगों के लिए यह सुकून की बात है कि मामले का मुख्य सूत्रधार पकड़ा जा चुका है, लेकिन इलाके में छिपे अन्य हिस्ट्रीशीटरों की गिरफ्तारी से ही असली सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी।



