गंगा-जमुनी तहजीब की महक के साथ शुरू हुआ उर्स-ए-रजवी
बरेली की फिजाओं में इन दिनों अकीदत और रूहानियत की खुशबू घुली हुई है। आला हजरत की दरगाह पर सालाना उर्स-ए-रजवी का आगाज हो चुका है, और इसी के साथ देश के कोने-कोने से जायरीन का जत्था बरेली पहुंचना शुरू हो गया है। इस साल यह मौका और भी खास है, क्योंकि उर्स का समय सावन के पवित्र महीने के साथ पड़ रहा है।
शाकाहारी लंगर: भाईचारे की एक नई पहल
आला हजरत दरगाह के प्रमुख सुब्हानी मियां ने इस बार एक बेहद सराहनीय अपील की है। उन्होंने सभी लंगर कमेटियों और व्यवस्थापकों से आग्रह किया है कि वे इस बार शाकाहारी भोजन ही परोसें। इस अपील के पीछे का मकसद सावन के महीने में स्थानीय भावनाओं का सम्मान करना और शहर में आपसी भाईचारे की मिसाल पेश करना है।
इस्लामिया इंटर कॉलेज मैदान बना केंद्र
उर्स-ए-रजवी के सभी प्रमुख कार्यक्रम और जलसे इस बार इस्लामिया इंटर कॉलेज के मैदान में आयोजित किए जा रहे हैं। सुरक्षा और व्यवस्था को देखते हुए प्रशासन ने कमर कस ली है।
- जायरीन की भारी भीड़ को देखते हुए रूट डायवर्जन लागू।
- लंगर कमेटियों को स्वच्छता और सादगी बनाए रखने के निर्देश।
- शहर भर में पुलिस और वालंटियर्स की तैनाती।
मायने और प्रभाव
आला हजरत दरगाह का उर्स केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि यह बरेली की पहचान है। सुब्हानी मियां द्वारा की गई शाकाहारी भोजन की अपील का संदेश दूरगामी है। यह कदम दिखाता है कि कैसे धर्मगुरुओं का एक छोटा सा सुझाव समाज में नफरत की दीवारें गिराकर मेल-मिलाप का पुल बना सकता है। स्थानीय स्तर पर, इससे न केवल शांति बनी रहेगी, बल्कि सावन के महीने में बरेली की ‘गंगा-जमुनी तहजीब’ को पूरी दुनिया में एक सकारात्मक पहचान भी मिलेगी।



