पीलीभीत के एक निजी अस्पताल में एक परिवार की खुशियां उस वक्त मातम में बदल गईं, जब ऑपरेशन के लिए भर्ती कराई गई 53 वर्षीय महिला की मौत हो गई। अस्पताल प्रबंधन की ओर से लापरवाही की खबरें सामने आते ही स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश है।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, महिला को स्वास्थ्य समस्याओं के चलते शहर के एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों का कहना है कि डॉक्टर ने उन्हें ऑपरेशन के लिए पूरी तरह आश्वस्त किया था, लेकिन सर्जरी के कुछ देर बाद ही उनकी स्थिति बिगड़ने लगी।
परिजनों का आरोप है कि अस्पताल स्टाफ ने समय पर कोई जवाब नहीं दिया और न ही मरीज की गंभीर स्थिति के बारे में उन्हें सही जानकारी दी गई। देखते ही देखते महिला ने दम तोड़ दिया, जिससे अस्पताल में हंगामा शुरू हो गया।
परिजनों का फूटा गुस्सा
महिला की मौत की खबर सुनते ही अस्पताल परिसर में तनाव का माहौल बन गया। परिजनों ने डॉक्टरों पर इलाज में गंभीर लापरवाही बरतने के आरोप लगाए हैं। मौके पर पहुंची पुलिस ने भीड़ को शांत कराने की कोशिश की और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया है।
पुलिस की कार्रवाई
पीलीभीत पुलिस का कहना है कि परिजनों की तहरीर के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। अस्पताल के रिकॉर्ड को खंगाला जा रहा है और अगर लापरवाही की पुष्टि होती है, तो संबंधित डॉक्टर और प्रबंधन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मायने और प्रभाव
यह घटना पीलीभीत के स्वास्थ्य तंत्र पर एक बड़ा सवालिया निशान है। शहर में बढ़ते निजी अस्पतालों के जाल में मरीजों की जान के साथ हो रही खिलवाड़ की यह पहली घटना नहीं है।
- जवाबदेही का अभाव: छोटी और बड़ी सर्जरी के दौरान मरीजों को सही जानकारी न देना निजी अस्पतालों की आम समस्या बन चुकी है।
- प्रशासनिक मॉनिटरिंग: स्वास्थ्य विभाग को निजी अस्पतालों के लाइसेंस और वहां कार्यरत डॉक्टरों की योग्यताओं की समय-समय पर जांच करनी चाहिए।
- आम जनता के लिए सीख: किसी भी अस्पताल को चुनने से पहले उसकी साख और सरकारी गाइडलाइंस के पालन की जानकारी अवश्य लें।
फिलहाल, पीड़िता के परिवार को न्याय का इंतजार है, जबकि स्थानीय लोग ऐसे अस्पतालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं ताकि भविष्य में कोई और परिवार इस त्रासदी का शिकार न हो।



