आगरा के डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के 92वें दीक्षांत समारोह में जब एक छात्र मंच पर चार स्वर्ण पदकों के साथ पहुंचा, तो हर कोई हैरान रह गया। यह कहानी है नरेंद्र सिंह की, जिन्होंने उस भीड़ से अलग रास्ता चुना, जहां अक्सर लाखों युवा भागते हैं।
सॉफ्टवेयर की कोडिंग से इकोनॉमिक्स के आंकड़ों तक
नरेंद्र का सफर किसी फिल्म से कम नहीं है। मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री पूरी करने के बाद उन्होंने आईटी सेक्टर में करियर शुरू किया, जहां एक अच्छी सैलरी और भविष्य की सुरक्षा थी। लेकिन नरेंद्र का मन किसी और ही विषय में रमता था।
बिना डरे उन्होंने अपनी कॉर्पोरेट नौकरी को अलविदा कहा और अर्थशास्त्र (Economics) के जटिल सिद्धांतों को अपना जुनून बनाया। उनका मानना था कि डिग्री से ज्यादा ज्ञान का महत्व है, और इसी सोच ने उन्हें आज सफलता के इस मुकाम पर खड़ा किया है।
कैसे हासिल की 9.2 सीजीपीए की कामयाबी?
एमए अर्थशास्त्र के दौरान नरेंद्र की मेहनत का अंदाजा उनके 9.2 सीजीपीए स्कोर से लगाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि अर्थशास्त्र केवल किताबों का विषय नहीं, बल्कि समाज को समझने का एक जरिया है।
- इंजीनियरिंग का अनुभव: डेटा को समझने की तार्किक शक्ति काम आई।
- अटूट अनुशासन: नौकरी छोड़ने के बाद उन्होंने अपनी पूरी ऊर्जा पढ़ाई पर केंद्रित कर दी।
- लक्ष्य पर फोकस: उन्होंने यह साबित किया कि उम्र या स्ट्रीम बदलने से प्रतिभा नहीं छुपती।
मायने और प्रभाव: क्या सीखती है आज की पीढ़ी?
नरेंद्र सिंह की यह उपलब्धि उन लाखों छात्रों के लिए एक आईना है जो भेड़चाल में फंसे हुए हैं। आज के दौर में जब युवा केवल ‘पैकेज’ के पीछे भाग रहे हैं, तब नरेंद्र जैसे छात्र यह दिखाते हैं कि यदि आप अपने विषय के प्रति ईमानदार हैं, तो सफलता खुद चलकर आपके पास आती है।
यह खबर आगरा और पूरे उत्तर प्रदेश के छात्रों के लिए एक प्रेरणा है। यह संदेश साफ है—करियर में बदलाव से घबराएं नहीं। अगर आपका जुनून सही दिशा में है, तो आप इतिहास रच सकते हैं।



