मानसून सत्र का दूसरा दिन: बजट और बवाल
उत्तर प्रदेश विधानमंडल के मानसून सत्र का दूसरा दिन आज सियासी उठापटक और तीखी बहस का केंद्र बना रहा। विधानसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी के बीच संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना ने 59 हजार करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट पेश किया। इस बजट में बुनियादी ढांचे के साथ-साथ जनकल्याणकारी योजनाओं पर विशेष जोर दिया गया है।
सदन में सियासी दंगल: ‘चंदा चोर’ बनाम ‘टोटी चोर’
सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी दल समाजवादी पार्टी ने जमकर हंगामा किया। विपक्ष ने राम मंदिर चंदे में अनियमितताओं और नीट पेपर लीक जैसे मुद्दों को लेकर तख्तियां हाथों में लीं और वेल तक पहुंच गए। जवाब में भाजपा विधायकों ने भी आक्रामक रुख अपनाते हुए ‘टोटी चोर’ के नारे लगाए। इस गहमागहमी के बीच सदन की कार्यवाही को बार-बार बाधित होना पड़ा।
कैबिनेट के 21 बड़े फैसले और एकजुटता का संदेश
बजट पेश करने से ठीक पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण कैबिनेट बैठक हुई, जिसमें प्रदेश के विकास से जुड़े 21 प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई। बैठक के बाद डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक का एक साथ, एक छतरी के नीचे मुस्कुराते हुए बाहर निकलना चर्चा का विषय रहा, जिसने पार्टी में एकजुटता का स्पष्ट संदेश दिया है।
विवादित बयान और बजट का स्वरूप
बजट के आंकड़ों पर नजर डालें तो ऊर्जा क्षेत्र के लिए 4722 करोड़ और समाज कल्याण के लिए 1655 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वहीं, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने एक विवादास्पद बयान देते हुए कहा कि वैश्विक स्तर पर होने वाले आतंकी हमले मदरसा शिक्षा का प्रमाण हैं, जिसने राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है।
मायने और प्रभाव: आम जनता के लिए क्या है खास?
- बुनियादी ढांचा: अनुपूरक बजट का बड़ा हिस्सा एक्सप्रेसवे और ग्रामीण सुविधाओं पर खर्च होगा, जिससे राज्य के कनेक्टिविटी नेटवर्क में सुधार की उम्मीद है।
- स्कूटी योजना: छात्राओं को मुफ्त स्कूटी देने का निर्णय महिला सशक्तिकरण और उनकी शिक्षा में बाधाओं को दूर करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
- राजनीतिक संदेश: केशव मौर्य और ब्रजेश पाठक की एकजुटता दर्शाती है कि आगामी चुनौतियों को देखते हुए भाजपा अपनी आंतरिक कलह को दरकिनार कर पूरी तरह से संगठित होकर चुनाव और सदन की चुनौतियों का सामना करने को तैयार है।
- विपक्ष का रुख: सपा का आक्रामक तेवर यह बताता है कि आने वाले दिनों में बेरोजगारी, पेपर लीक और भ्रष्टाचार के मुद्दे सरकार के लिए सदन के अंदर और बाहर कड़ी चुनौती पेश करेंगे।