अगर आप आगरा में सरकारी काम-काज को लेकर किसी तहसील के चक्कर काट रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए जानना बेहद जरूरी है। उत्तर प्रदेश सरकार की जनसुनवाई पोर्टल (IGRS) की ताजा रैंकिंग ने आगरा के सरकारी तंत्र की पोल खोल दी है। इस मूल्यांकन में एत्मादपुर ने जहां अपनी कार्यक्षमता का लोहा मनवाया है, वहीं सदर तहसील की सुस्ती ने आम जनता की परेशानी बढ़ा दी है।
एत्मादपुर बना ‘टॉप’, सदर की हालत खस्ता
जुलाई 2026 की IGRS रिपोर्ट में आगरा की तहसीलों का प्रदर्शन मिला-जुला रहा है। एत्मादपुर तहसील ने 87 अंक हासिल कर पूरे प्रदेश में 50वीं रैंक हासिल की है, जो इसे जिले में अव्वल बनाती है। वहीं दूसरी तरफ, सदर तहसील का प्रदर्शन निराशाजनक रहा है। सबसे ज्यादा शिकायतों का बोझ झेलने वाली सदर तहसील को मात्र 73 अंक मिले हैं, जिससे वह पूरे प्रदेश में 190वें पायदान पर खिसक गई है।
क्यों पिछड़ी सदर तहसील?
- शिकायतों का दबाव: सदर तहसील में लंबित मामलों और नई शिकायतों की संख्या सबसे ज्यादा है, जिसे समय पर निपटाने में अधिकारी फेल नजर आ रहे हैं।
- कार्यशैली पर सवाल: शिकायतों के निस्तारण की गुणवत्ता और समयसीमा का पालन न होना इसकी बड़ी वजह है।
- जवाबदेही का अभाव: फीडबैक और निस्तारण प्रक्रिया में लापरवाही सीधे जनता के असंतोष के रूप में सामने आई है।
मायने और प्रभाव: जनता पर क्या असर?
IGRS रैंकिंग सिर्फ अंकों का खेल नहीं है, यह इस बात का पैमाना है कि आपकी शिकायत पर सरकारी तंत्र कितना संजीदा है। एत्मादपुर की सफलता यह साबित करती है कि अगर अधिकारी चाहें तो फाइलों का निपटारा तेजी से हो सकता है।
सदर तहसील का फिसड्डी होना यह दर्शाता है कि वहां प्रशासनिक कसावट की सख्त जरूरत है। जब शिकायतें पेंडिंग रहती हैं, तो इसका सीधा असर आम आदमी की जेब और समय पर पड़ता है। प्रशासन को अब सदर तहसील के कामकाज की समीक्षा करनी होगी, वरना जनता का भरोसा सरकारी दावों से पूरी तरह उठ सकता है।



