सावन के पवित्र महीने का पहला सोमवार बरेली के लिए भक्ति का एक अद्भुत संगम लेकर आया है। रविवार की आधी रात बीतते ही शहर के प्रसिद्ध नाथ मंदिरों के कपाट खुल गए और हर तरफ ‘बम-बम भोले’ के जयघोष सुनाई देने लगे। भोर होने से पहले ही मंदिरों के बाहर लंबी कतारें लग गईं, जिससे पूरे शहर में शिव भक्ति की लहर दौड़ गई है।
श्रद्धालुओं का आस्था और उत्साह
बरेली को ‘नाथ नगरी’ के रूप में जाना जाता है, और सावन के पहले सोमवार पर यहां के सात प्रमुख नाथ मंदिरों में भक्तों का तांता लगा हुआ है। अलखनाथ मंदिर, तपेश्वरनाथ, वनखंडीनाथ और धोपेश्वरनाथ जैसे प्रमुख मंदिरों में जलाभिषेक के लिए श्रद्धालु घंटों से इंतजार करते दिखे। कई भक्त तो रविवार रात से ही कतार में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे।
सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम
- प्रमुख मंदिरों के आसपास भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
- कांवड़ियों की भीड़ को देखते हुए यातायात में बदलाव किए गए हैं।
- सीसीटीवी कैमरों से मंदिर परिसर और मुख्य रास्तों की निगरानी की जा रही है।
मायने और प्रभाव: आम जनमानस पर असर
सावन का पहला सोमवार केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और सामाजिक समरसता के लिए भी महत्वपूर्ण है। नाथ नगरी बरेली में इस दिन बड़ी संख्या में बाहरी श्रद्धालु भी पहुंचते हैं, जिससे स्थानीय बाजारों और फूल-माला विक्रेताओं के व्यापार में उछाल आता है। साथ ही, यह दिन कांवड़ यात्रा के दौरान समुदाय के बीच अनुशासन और सेवा भाव का भी प्रतीक है। बढ़ती भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने शहर की शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए कमर कस ली है, ताकि आस्था के इस पर्व में किसी प्रकार का व्यवधान न आए।



