कानपुर में अगर आप बिजली चोरी या अवैध कनेक्शन का सहारा ले रहे हैं, तो सावधान हो जाइए। शहर में बिजली की किल्लत और लाइन लॉस कम करने के लिए प्रशासन ने अब कमर कस ली है। केस्को (KESCO) और एंटी पावर थेफ्ट विंग ने एक ऐसी रणनीति बनाई है, जो बिजली चोरों की नींद उड़ाने के लिए काफी है।
संयुक्त टीम का कड़ा पहरा
केस्को मुख्यालय में हाल ही में एक उच्चस्तरीय बैठक हुई, जिसमें एमडी नेहा जैन और यूपीपीसीएल के एडीजी डॉ. आरके स्वर्णकार मौजूद रहे। इस बैठक में स्पष्ट कर दिया गया है कि अब बिजली चोरी के खिलाफ महज खानापूर्ति नहीं होगी, बल्कि मौके पर जाकर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने अब विजिलेंस थानों को भी सक्रिय कर दिया है ताकि सूचना मिलते ही फौरन कार्रवाई की जा सके।
लापरवाह कर्मचारियों पर भी गिरेगी गाज
इस अभियान का एक बड़ा पहलू केवल उपभोक्ता ही नहीं, बल्कि विभाग के अंदर बैठे ‘काले भेड़’ भी हैं। एडीजी डॉ. आरके स्वर्णकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यदि किसी क्षेत्र में बिजली चोरी की घटनाएं लगातार हो रही हैं और संबंधित कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी विभागीय जांच और कठोर कार्रवाई तय है।
- छापेमारी के लिए विशेष टास्क फोर्स का गठन।
- अवैध कनेक्शन हटाते ही मौके पर जुर्माना और FIR की तैयारी।
- विजिलेंस थानों की निगरानी और बढ़ेगी।
मायने और प्रभाव: आम जनता के लिए क्या बदलेगा?
कानपुर के आम उपभोक्ताओं के लिए यह खबर राहत भरी है। जब बिजली चोरी रुकती है, तो ट्रांसफार्मर पर लोड कम होता है और ट्रिपिंग की समस्या में कमी आती है। अक्सर देखा गया है कि अवैध कनेक्शन के कारण आम उपभोक्ताओं को कम वोल्टेज या बार-बार बिजली कटने की मार झेलनी पड़ती है। अब प्रशासन की इस सख्ती का असर सीधे तौर पर बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता में सुधार के रूप में दिखेगा। यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि ईमानदारी से बिल चुकाने वाले ग्राहकों को इसका सीधा फायदा मिले और उन्हें निर्बाध बिजली मिले।



