चार साल बाद अंकित शर्मा के परिवार को मिला इंसाफ
साल 2020 में दिल्ली दंगों के दौरान हुई आईबी (IB) अधिकारी अंकित शर्मा की नृशंस हत्या ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। अब दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने इस मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है।
क्या है पूरा मामला?
फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़के दंगों के दौरान अंकित शर्मा की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। उनका शव चांद बाग इलाके के एक नाले से बरामद हुआ था, जिसके बाद यह मामला देश भर में चर्चा का केंद्र बन गया था। पुलिस की जांच में सामने आया था कि भीड़ ने अंकित शर्मा को निशाना बनाया और उनकी हत्या की साजिश रची गई थी।
ताहिर हुसैन और अन्य दोषी
कोर्ट ने ताहिर हुसैन को मास्टरमाइंड मानते हुए सख्त सजा सुनाई है। इसके अलावा अन्य चार लोगों को भी हत्या और दंगा भड़काने का दोषी करार दिया गया। अदालत ने अपनी टिप्पणी में कहा कि यह घटना रोंगटे खड़े कर देने वाली है और कानून की नजर में इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता।
मायने और प्रभाव
इस फैसले के दूरगामी प्रभाव हैं:
- न्याय प्रणाली में भरोसा: इतने संवेदनशील मामले में सख्त सजा कानून के प्रति आम जनता का विश्वास मजबूत करती है।
- सांप्रदायिक दंगों पर नकेल: यह सजा दंगाइयों के लिए एक कड़ा संदेश है कि कानून के हाथ लंबे हैं, चाहे अपराधी कितना भी रसूखदार क्यों न हो।
- राजनीतिक जवाबदेही: एक पूर्व पार्षद का दोषी पाया जाना राजनीति में अपराधीकरण की समस्या को फिर से चर्चा के केंद्र में ले आया है।
अंकित शर्मा के परिवार के लिए यह फैसला बेशक राहत लेकर आया है, लेकिन उनके घाव ताउम्र बने रहेंगे। वहीं, ताहिर हुसैन ने इस फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती देने की बात कही है, जिससे कानूनी लड़ाई अभी और आगे बढ़ सकती है।




