उत्तर प्रदेश में मानसून की चाल एक बार फिर से धीमी पड़ गई है। पिछले कुछ दिनों से आसमान में बादलों की लुकाछिपी तो चल रही है, लेकिन झमाझम बारिश के इंतजार में बैठे लोगों के हाथ सिर्फ निराशा लग रही है। मौसम विभाग की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश में मानसून की रेखा अपनी जगह पर स्थिर हो गई है, जिससे राज्य के अधिकांश हिस्सों में अगले तीन अगस्त तक उमस भरी गर्मी लोगों को परेशान करेगी।
क्यों थमा मानसून का रफ्तार?
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून ट्रफ लाइन अपनी सामान्य स्थिति से दक्षिण की ओर खिसक गई है। इस वजह से उत्तर प्रदेश के ज्यादातर जिलों में नमी वाली हवाएं नहीं पहुंच पा रही हैं। फिलहाल, पश्चिमी और पूर्वी यूपी के कुछ ही इलाकों में छिटपुट बारिश की संभावना बनी हुई है, जबकि बाकी राज्य भीषण उमस की चपेट में है।
अगले कुछ दिनों का हाल और पूर्वानुमान
आने वाले 72 घंटों में तापमान में कोई बड़ी गिरावट के आसार नहीं हैं। विभाग ने बताया है कि 3 अगस्त तक प्रदेश के ज्यादातर जिलों में मौसम शुष्क रहेगा।
- पूर्वांचल: गोरखपुर, वाराणसी और आसपास के जिलों में बादल छाए रहेंगे, लेकिन बारिश कम होगी।
- मध्य और पश्चिमी यूपी: लखनऊ, कानपुर और आगरा में धूप और उमस का असर सबसे ज्यादा देखने को मिलेगा।
- पहाड़ी सीमा: उत्तराखंड से सटे जिलों में कहीं-कहीं हल्की बौछारें राहत दे सकती हैं।
मायने और प्रभाव: आम जनजीवन पर असर
मानसून के इस ब्रेक का सीधा असर खेती और बिजली की खपत पर पड़ रहा है। धान की रोपाई कर चुके किसानों के लिए यह समय बेहद संवेदनशील है, क्योंकि इस दौर में फसलों को पर्याप्त पानी की जरूरत होती है। वहीं, शहरों में उमस के कारण बीमारियां पनपने का खतरा भी बढ़ जाता है। बिजली की भारी मांग बढ़ने से ग्रिड पर दबाव बढ़ सकता है और ट्रिपिंग की समस्या आम हो सकती है। फिलहाल, राहत के लिए अगस्त के पहले हफ्ते का इंतजार करना ही एकमात्र विकल्प बचा है।




