फर्रुखाबाद के खुड़ना वैध गांव में बुधवार की सुबह एक ऐसी खौफनाक घटना घटी, जिसने पूरे इलाके को सन्न कर दिया। एक बेटे ने अपनी ही मां की निर्मम हत्या कर दी। कातिल बेटा खुद को ‘काली का पुजारी’ बता रहा था और उसके चेहरे पर पछतावे के बजाय एक अजीब सी सनक थी।
क्या है पूरा मामला?
बुधवार सुबह जब गांव वाले अपने रोजमर्रा के कामों में व्यस्त थे, तब एक घर से चीखने-चिल्लाने की आवाजें आने लगीं। पंकज राठौर नाम के युवक ने घर का दरवाजा अंदर से बंद किया और अपनी मां पर जानलेवा हमला कर दिया। उसने पत्थर के सिल-बट्टे और ईंटों से अपनी मां का सिर कुचल दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
बहन को भी उतारा मौत के घाट उतारने की कोशिश
जब पंकज की बहन सुषमा ने अपनी मां को बचाने की कोशिश की, तो वह हैवानियत पर उतारू भाई ने उस पर भी हमला बोल दिया। बहन की चीखें सुनकर आसपास के ग्रामीण वहां पहुंचे। किसी तरह दरवाजा तोड़कर गांव वालों ने सुषमा को उसके चंगुल से बाहर निकाला और उसकी जान बचाई।
पुलिस और जांच
मौके पर पहुंची पुलिस ने आरोपी पंकज को हिरासत में ले लिया है। प्राथमिक जांच में वह मानसिक रूप से अस्वस्थ प्रतीत हो रहा है। परिजनों का कहना है कि उसका व्यवहार पिछले कुछ समय से सामान्य नहीं था। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या यह कोई अंधविश्वास का मामला है या वाकई मानसिक बीमारी का परिणाम।
मायने और प्रभाव
यह घटना समाज के लिए एक बड़ा आईना है। अक्सर मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को हम ‘भूत-प्रेत’ या ‘अंधविश्वास’ के चश्मे से देखते हैं और नजरअंदाज कर देते हैं। इस घटना ने साबित कर दिया है कि समय रहते मानसिक लक्षणों की पहचान न करना कितना भारी पड़ सकता है। स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को अब ग्रामीण स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने की सख्त जरूरत है ताकि ऐसे खौफनाक हादसों को रोका जा सके।



