प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल: आईएएस अधिकारी को ही नहीं मिला बैठने का ठिकाना
उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। राज्य के चर्चित आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही, जो अपनी ईमानदारी और सख्त कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं, उन्हें नए तहसील भवन में बैठने के लिए जगह तक नसीब नहीं हुई। यह वाकया तब हुआ जब वे अपने जरूरी अभिलेख और फर्नीचर के साथ वहां पहुंचे थे।
पांच घंटे तक चलता रहा घटनाक्रम
जानकारी के अनुसार, रिंकू सिंह राही उप जिलाधिकारी (न्यायिक) के रूप में कार्यभार संभालने के लिए नए तहसील भवन पहुंचे थे। वहां पहुंचते ही उन्हें पता चला कि उनके बैठने के लिए कोई कक्ष आवंटित ही नहीं किया गया है। इसके बाद शुरू हुआ पांच घंटे का लंबा इंतजार, जिसमें अधिकारी को इधर-उधर भटकना पड़ा।
- कक्ष आवंटन को लेकर प्रशासन की लापरवाही आई सामने।
- फर्नीचर और जरूरी सरकारी दस्तावेज लेकर भटकते रहे अधिकारी।
- रात करीब नौ बजे तक अनिश्चितता का माहौल बना रहा।
सूत्रों की मानें तो प्रशासनिक तालमेल की कमी के कारण यह स्थिति पैदा हुई। एक वरिष्ठ अधिकारी को सरकारी भवन में जगह न मिलना न केवल व्यवस्था पर सवाल उठाता है, बल्कि काम करने की प्रक्रिया में आ रही बाधाओं को भी दर्शाता है।
मायने और प्रभाव: आम आदमी का क्या होगा?
जब एक आईएएस अधिकारी जैसी हस्ती को अपने दफ्तर के लिए घंटों इंतजार करना पड़े, तो आम जनता की स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। यह घटना दर्शाती है कि तहसील स्तर पर फाइलों और कक्षों के आवंटन को लेकर कितनी ढिलाई बरती जा रही है। इसका सीधा असर जनता के उन कार्यों पर पड़ता है, जो इन दफ्तरों से होने हैं। यदि प्रशासनिक अधिकारियों के बीच समन्वय का ऐसा अभाव रहेगा, तो आम नागरिकों को अपने छोटे-मोटे काम के लिए भी सरकारी चक्कर काटने की मजबूरी बनी रहेगी। यह प्रशासन के भीतर व्याप्त उदासीनता का एक बड़ा संकेत है।



