दिल्ली के RML अस्पताल में साए की तरह पुलिस
जंतर-मंतर पर हाल ही में हुए ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान गंभीर रूप से घायल हुई 21 वर्षीय छात्रा साक्षी का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। फिलहाल साक्षी आरएमएल (RML) अस्पताल में भर्ती है, लेकिन उसकी स्थिति से ज्यादा अस्पताल के भीतर का माहौल चर्चा का विषय बना हुआ है।
अस्पताल के ICU से लेकर कॉरिडोर और लिफ्ट तक भारी संख्या में पुलिस बल तैनात है। आलम यह है कि मीडियाकर्मियों को भी साक्षी से मिलने या उसके परिवार से बात करने से रोका जा रहा है। आखिर एक घायल छात्रा के इर्द-गिर्द सुरक्षा का इतना बड़ा घेरा क्यों बनाया गया है?
72 घंटे बाद क्या है साक्षी की हालत?
घटना के बाद से ही साक्षी की हालत को लेकर अलग-अलग कयास लगाए जा रहे थे। शुरुआत में उसे वेंटिलेटर पर रखा गया था। अब अस्पताल प्रबंधन ने ताजा मेडिकल बुलेटिन जारी कर बताया है कि साक्षी की हालत में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है।
हालांकि, डॉक्टरों का कहना है कि सिर पर लगी चोट गंभीर है, जिसके कारण अभी भी उसे कड़ी निगरानी में रखा गया है। परिवार का आरोप है कि उन्हें साक्षी से मिलने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे पुलिस प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं।
मायने और प्रभाव: यह सवाल क्यों जरूरी है?
- प्रशासनिक जवाबदेही: एक नागरिक प्रदर्शन के दौरान घायल होता है, तो क्या अस्पताल में पुलिस का पहरा उसे सुरक्षा देने के लिए है या किसी को मिलने से रोकने के लिए?
- लोकतंत्र और अभिव्यक्ति: जंतर-मंतर जैसे संवेदनशील स्थान पर सुरक्षा व्यवस्था और उसके बाद अस्पताल में मीडिया पर पाबंदी, लोकतंत्र में सूचना के अधिकार पर सीधा प्रहार करती है।
- जनता का विश्वास: जब सरकारी संस्थान पारदर्शिता नहीं बरतते, तो जनता के बीच अफवाहें और अविश्वास की स्थिति पैदा होती है।
यह घटना सिर्फ एक छात्रा के घायल होने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशासन और नागरिकों के बीच के भरोसे की लड़ाई है। साक्षी कब तक अस्पताल में रहेगी और जांच किस दिशा में जाएगी, इस पर पूरे देश की नज़र टिकी है।



