उत्तर प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहा डाका अब सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संज्ञान में है। राज्य में बिजली बिलों में गड़बड़ी और ओवर बिलिंग की बढ़ती शिकायतों ने सीएम के सब्र का बांध तोड़ दिया है। मुख्यमंत्री ने लखनऊ में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक के दौरान पावर कॉरपोरेशन के आला अधिकारियों को न केवल तलब किया, बल्कि सख्त लहजे में सवाल भी पूछा कि आखिर आम आदमी को हर महीने बिजली विभाग के चक्कर क्यों काटने पड़ रहे हैं?
क्या है पूरा मामला?
पिछले कुछ महीनों से राज्य के कई जिलों से बिजली बिलों के अनाप-शनाप आने की शिकायतें लगातार मिल रही थीं। मीटर की रीडिंग में गड़बड़ी और फिक्स्ड चार्ज के नाम पर वसूली की खबरों ने उपभोक्ताओं को परेशान कर रखा है। सीएम योगी ने साफ कहा है कि सुशासन का मतलब जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान है, और बिजली विभाग की इस लापरवाही को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अधिकारियों पर बरसी गाज
बैठक में सीएम ने निर्देश दिए हैं कि जिन इलाकों से बिलिंग में गड़बड़ी की सबसे ज्यादा शिकायतें आ रही हैं, वहां के नोडल अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर मीटर रीडर या स्थानीय स्तर पर बिलिंग में हेराफेरी पाई जाती है, तो विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ उन पर कानूनी शिकंजा भी कसा जाएगा।

मायने और प्रभाव
इस सख्ती के मायने साफ हैं कि सरकार अब ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रही है। आम जनता के लिए इसके प्रमुख प्रभाव इस प्रकार हो सकते हैं:
- पारदर्शिता: बिजली विभाग को अब रीडिंग और बिलिंग प्रक्रिया को पूरी तरह से डिजिटल और पारदर्शी बनाना होगा।
- जनता को राहत: ओवर बिलिंग के मामलों में कमी आने से मध्यमवर्गीय और किसान परिवारों के आर्थिक बोझ में सीधे तौर पर कमी आएगी।
- जवाबदेही: अब बिजली विभाग के कर्मचारी मनमानी करने से बचेंगे क्योंकि सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय से मॉनिटरिंग की जा रही है।
यह कदम आने वाले दिनों में यूपी के बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है, बशर्ते निचले स्तर के अधिकारी सरकार के इन निर्देशों का गंभीरता से पालन करें।


