हाथरस की धरती पर दो साल पहले जो मंजर बिखरा था, उसकी टीस आज भी लोगों के जेहन में ताजा है। सिकंदराराऊ के फुलरई मुगलगढ़ी गांव में हुए उस भीषण सत्संग हादसे में 121 निर्दोष लोगों ने अपनी जान गंवा दी थी। अब, कानूनी लड़ाई एक निर्णायक मोड़ पर है।
कोर्ट में पहुंची गवाही, क्या बोले दरोगा?
हाथरस की अदालत में इस मामले की सुनवाई तेजी से चल रही है। हाल ही में इस केस में 34वें गवाह के तौर पर एक दरोगा ने अपनी गवाही दर्ज कराई है। यह गवाही हादसे की भयावहता और प्रशासनिक तैयारियों में रही चूक को समझने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
क्या हुआ था उस मनहूस दिन?
2 जुलाई 2024 की वो तारीख शायद ही उत्तर प्रदेश कभी भूल पाए। साकार विश्व हरि ‘भोले बाबा’ के सत्संग में उमड़ी भारी भीड़ अचानक बेकाबू हो गई थी। मची भगदड़ ने देखते ही देखते 121 परिवारों के चिराग बुझा दिए थे। लापरवाही के इस कदर बड़े आरोपों के बाद प्रशासन और आयोजकों की भूमिका पर सवालिया निशान खड़े हुए थे।
मायने और प्रभाव
- न्याय की उम्मीद: 34 गवाहों का बयान दर्ज होना बताता है कि केस मजबूती से आगे बढ़ रहा है और पीड़ित परिवारों को इंसाफ की उम्मीद जगी है।
- प्रशासनिक सबक: इस हादसे ने भविष्य के लिए बड़े धार्मिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन के कड़े नियमों को अनिवार्य बना दिया है।
- सुरक्षा का सवाल: यह मामला एक बड़ा सबक है कि आस्था की आड़ में सुरक्षा मानकों से समझौता करना कितनी बड़ी कीमत वसूल सकता है।
पीड़ित परिवार आज भी उसी दिन की बाट जोह रहे हैं जब दोषियों को सजा मिलेगी। अदालत की यह प्रक्रिया न केवल कानूनी कार्रवाई का हिस्सा है, बल्कि उन 121 जिंदगियों को श्रद्धांजलि देने का भी एक जरिया है।




