कानपुर में एक बार फिर बिजली विभाग की जानलेवा लापरवाही ने एक हंसते-खेलते घर का चिराग बुझा दिया है। शहर के एक व्यस्त इलाके में छह साल का मासूम बच्चा खेलते-खेलते मौत की गोद में समा गया। इस घटना ने न केवल परिवार को गहरा सदमे में डाल दिया है, बल्कि स्थानीय लोगों में भी केस्को (KESCO) के खिलाफ भारी आक्रोश है।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, बच्चा घर के बाहर खेल रहा था, तभी वह बिजली के एक खुले तार या जर्जर पोल की चपेट में आ गया। बिजली का करंट इतना जोरदार था कि मासूम को संभलने का मौका तक नहीं मिला। आस-पास के लोगों ने आनन-फानन में उसे अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
केस्को की कार्यप्रणाली पर सवाल
परिजनों का आरोप है कि इलाके में बिजली के तारों की स्थिति बेहद दयनीय है। कई बार शिकायत करने के बावजूद केस्को के अधिकारियों ने लटकते और नंगे तारों को ठीक करने की जहमत नहीं उठाई। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब बिजली विभाग की लापरवाही किसी की जान पर भारी पड़ी है।

मायने और प्रभाव
यह घटना किसी एक परिवार का निजी नुकसान नहीं है, बल्कि यह सिस्टम की उस विफलता को दर्शाती है जो आए दिन आम आदमी की सुरक्षा को दांव पर लगाती है।
- सुरक्षा ऑडिट की जरूरत: इस हादसे के बाद शहर के जर्जर तारों का तत्काल सुरक्षा ऑडिट अनिवार्य हो गया है।
- जवाबदेही तय हो: यदि केस्को समय रहते तारों की मरम्मत कर देता, तो शायद यह जान बचाई जा सकती थी। अब जनता दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रही है।
- अभिभावकों के लिए चेतावनी: मानसून के दौरान बिजली के पोल और तारों से दूरी बनाए रखना ही एकमात्र बचाव है, लेकिन सिस्टम को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।
प्रशासन ने इस मामले में जांच के आदेश दिए हैं, लेकिन सवाल यह है कि क्या जांच से बच्चे की जान वापस आ सकेगी? शहर के लोग अब सड़कों पर उतरकर केस्को से सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग कर रहे हैं।


