अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की सुरक्षा और दान-पात्रों की व्यवस्था को लेकर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अब एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। हाल ही में चढ़ावे की चोरी की घटनाओं ने मंदिर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए थे, जिसके बाद अब पारदर्शिता को प्राथमिकता दी जा रही है।
पारदर्शिता के लिए नया कदम
ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि मंदिर में आने वाले चढ़ावे का अब महीने-दर-महीने ऑडिट किया जाएगा। सबसे अहम बात यह है कि इस ऑडिट की रिपोर्ट को ट्रस्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक किया जाएगा। इसका सीधा उद्देश्य आम श्रद्धालुओं के मन में विश्वास को और अधिक मजबूत करना है।
बदली जाएगी दान-पात्रों की व्यवस्था
सिर्फ रिपोर्ट सार्वजनिक करना ही नहीं, बल्कि मंदिर परिसर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम भी किए जा रहे हैं। चोरी की घटनाओं के बाद अब मंदिर परिसर के भीतर सीसीटीवी कैमरों की संख्या बढ़ाने और दान-पात्रों के पास सुरक्षाकर्मियों की निगरानी को 24 घंटे सक्रिय रखने के निर्देश दिए गए हैं।

- मासिक ऑडिट: हर महीने की आय-व्यय का ब्यौरा वेबसाइट पर होगा।
- डिजिटल सुरक्षा: दान पेटियों के पास हाई-टेक कैमरों की निगरानी।
- जवाबदेही: कर्मचारियों की ड्यूटी में बदलाव और सत्यापन।
मायने और प्रभाव: आम जनता के लिए क्या है खास?
अयोध्या आने वाले लाखों श्रद्धालु अपनी गाढ़ी कमाई का हिस्सा प्रभु के चरणों में अर्पित करते हैं। चढ़ावे में चोरी की खबरें न केवल सुरक्षा पर सवाल उठाती हैं, बल्कि श्रद्धालुओं की आस्था को भी ठेस पहुंचाती हैं। ट्रस्ट का यह निर्णय एक ‘चेक एंड बैलेंस’ सिस्टम तैयार करेगा। जब ऑडिट रिपोर्ट जनता के सामने होगी, तो जवाबदेही तय होगी। यह न केवल मंदिर की वित्तीय पारदर्शिता बढ़ाएगा, बल्कि भविष्य में होने वाली धांधली पर भी लगाम लगाएगा। अयोध्या की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से मंदिर पर टिकी है, ऐसे में इस तरह के प्रशासनिक सुधार पूरे शहर की छवि के लिए एक सकारात्मक संकेत हैं।



