उन्नाव की सड़कों पर दौड़ता ‘काल’ एक बार फिर बेगुनाह की जान ले गया। शादी की खुशियों में शरीक होने निकले एक पिता और पुत्र के लिए सड़क का वह सफर आखिरी साबित हुआ। आवारा पशुओं के आतंक ने एक हंसते-खेलते परिवार को ताउम्र न मिटने वाला गम दे दिया है।
क्या है पूरा मामला?
घटना उन्नाव जिले के अरगूपुर गांव के पास की है। बाइक पर सवार पिता-पुत्र किसी मांगलिक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए जा रहे थे। तभी अचानक सड़क के बीचों-बीच आए एक सांड से उनकी बाइक की जोरदार टक्कर हो गई।
टक्कर इतनी भीषण थी कि बाइक अनियंत्रित होकर दूर जा गिरी। हादसे में पिता की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि उनके बेटे की हालत बेहद गंभीर बताई जा रही है। उसे इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
आवारा मवेशियों का बढ़ता खतरा
- सड़कों पर घूमते लावारिस सांड अक्सर हादसों का सबब बनते हैं।
- तेज रफ्तार वाहनों और मवेशियों की टक्कर से आए दिन मौतें हो रही हैं।
- स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन द्वारा गोवंश के प्रबंधन के दावों का असर धरातल पर नहीं दिख रहा है।
मायने और प्रभाव: आम आदमी के लिए क्यों जरूरी?
यह महज एक दुर्घटना नहीं, बल्कि एक गंभीर प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा है। आवारा मवेशियों की समस्या उत्तर प्रदेश के कई जिलों में एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
प्रशासनिक विफलता: सरकारी कागजों में गो-आश्रय स्थलों के दावे किए जाते हैं, लेकिन सड़कों पर मवेशियों की मौजूदगी यह बताती है कि जमीनी हकीकत कुछ और है। हर दिन किसी न किसी परिवार का चिराग बुझ रहा है।
सड़क सुरक्षा: यदि हम अब भी नहीं संभले, तो यह खतरा किसी और के दरवाजे पर दस्तक दे सकता है। सरकार को इन मवेशियों के स्थायी समाधान के लिए युद्धस्तर पर काम करने की जरूरत है, ताकि भविष्य में कोई और परिवार इस तरह से उजड़ने से बच सके।



