गोरखपुर की सड़कों पर उस वक्त हड़कंप मच गया जब एक 12 साल के मासूम की चीखें सुनाई दीं, ‘मुझे बचाओ, ये लोग मुझे किडनैप कर रहे हैं!’ बच्चा सड़क पर जोर-जोर से रो रहा था और राहगीरों से मदद की गुहार लगा रहा था। लेकिन जब पुलिस मौके पर पहुंची और हकीकत सामने आई, तो मामला कुछ और ही निकला।
स्कूल न जाने की जिद और फिल्मी ड्रामा
घटना उस वक्त की है जब गर्मी की छुट्टियां खत्म होने के बाद मां अपने बेटे को ननिहाल से लेने पहुंची थी। जैसे ही वे ननिहाल से महज 100 मीटर की दूरी पर पहुंचे, बच्चे ने अचानक हंगामा शुरू कर दिया। उसने पास से गुजर रहे बाइक सवार एक महिला और पुरुष की ओर इशारा करते हुए उन्हें किडनैपर बता दिया।
बच्चे की चीख-पुकार सुनकर वहां भीड़ जमा हो गई। लोग उस महिला और पुरुष को घेरने लगे, जबकि वे दोनों पूरी तरह अनजान थे कि आखिर हो क्या रहा है। आनन-फानन में पुलिस को सूचना दी गई।
पुलिस जांच में खुला असली राज
पुलिस ने जब सख्ती से बच्चे से पूछताछ की और सीसीटीवी खंगाले, तो दूध का दूध और पानी का पानी हो गया। बच्चे ने कबूला कि वह स्कूल खुलने से बेहद डरा हुआ था। उसने पढ़ाई से बचने के लिए यह पूरा प्लान बनाया था ताकि उसे वापस नानी के घर ही रहने दिया जाए।
मायने और प्रभाव: अभिभावकों के लिए सबक
- तनाव का संकेत: बच्चों पर पढ़ाई का बोझ कभी-कभी इस कदर हावी हो जाता है कि वे असामान्य कदम उठाने लगते हैं।
- खुला संवाद जरूरी: बच्चों की मानसिक स्थिति को समझने के लिए उनसे बात करना जरूरी है। क्या वह स्कूल जाने से डर रहा है या वहां कोई समस्या है?
- सुरक्षा पर सतर्कता: हालांकि यह एक ड्रामा था, लेकिन भीड़ का बिना सोचे-समझे किसी पर आरोप लगाना खतरनाक साबित हो सकता है।
इस घटना ने साबित कर दिया है कि आज की पीढ़ी का ‘स्कूल स्ट्रेस’ किस हद तक बढ़ चुका है। अभिभावकों के लिए यह एक संकेत है कि बच्चों की शैक्षणिक चिंताओं को नजरअंदाज न करें और उन्हें सहानुभूति के साथ समझने की कोशिश करें।




