क्या जमीन निगल गई मोसीम को?
फतेहपुर में लापता हुए मोसीम का मामला अब एक बेहद उलझी हुई पहेली बन चुका है। पुलिस ने महीनों की कड़ी मशक्कत के बाद 93 लावारिस शवों का डीएनए टेस्ट करवाया, लेकिन नतीजा सिफर रहा। यह खुलासा इस केस की गंभीरता को और बढ़ा देता है कि आखिर मोसीम गया तो गया कहाँ?
DNA रिपोर्ट से मिली हताशा
तफ्तीश में जुटी पुलिस और मोसीम के परिजन उम्मीद लगाए बैठे थे कि शायद किसी लावारिस शव से डीएनए मिल जाए। लेकिन फोरेंसिक लैब की रिपोर्ट ने उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। इसका सीधा मतलब यह है कि मोसीम उन लावारिस शवों में से कोई नहीं है, जिनकी अब तक पहचान नहीं हो पाई है।
अब नार्को टेस्ट ही आखिरी उम्मीद
जांच की दिशा अब उन पांच आरोपियों की ओर मुड़ गई है, जो इस पूरे मामले में शक के घेरे में हैं। पुलिस ने अब कानूनी प्रक्रिया के तहत इन सभी आरोपियों का नार्को टेस्ट करवाने का फैसला किया है। इसके लिए हाईकोर्ट से अनुमति मांगी गई है और आरोपी भी इसके लिए तैयार हो गए हैं।
क्या सच उगल पाएंगे आरोपी?
- वैज्ञानिक जांच: नार्को टेस्ट के जरिए पुलिस यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि क्या आरोपियों ने कोई राज छुपाया है।
- साक्ष्य का अभाव: डीएनए रिपोर्ट के फेल होने के बाद अब पुलिस के पास आरोपियों के बयानों में विरोधाभास ढूंढने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
- परिजनों का दर्द: मोसीम की मां और परिवार पिछले कई महीनों से अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे हैं।
मायने और प्रभाव: आम जनता के लिए क्या है संकेत?
यह मामला फतेहपुर ही नहीं, पूरे उत्तर प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है। किसी व्यक्ति के यूं अचानक गायब हो जाने और पुलिस द्वारा 93 शवों तक की जांच करने के बाद भी नतीजा न निकलना, हमारी फोरेंसिक और पुलिसिया तफ्तीश की सीमाओं को दर्शाता है। यदि नार्को टेस्ट में भी सच्चाई बाहर नहीं आती है, तो यह केस पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती बन जाएगा। आम लोग अब इस बात पर नजर गड़ाए हुए हैं कि क्या कानून की प्रक्रिया उस सच को बाहर ला पाएगी, जो पिछले कई महीनों से फतेहपुर की फाइलों में दफन है।

