उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग ने एक बार फिर बच्चों के सुनहरे भविष्य और उन्हें लाइलाज बीमारी से बचाने का बीड़ा उठाया है। आज से पूरे राज्य में पल्स पोलियो महाअभियान का आगाज हो गया है, जिसके तहत 3.30 करोड़ बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाने का लक्ष्य रखा गया है।
क्यों जरूरी है यह अभियान?
भारत ने भले ही पोलियो को पूरी तरह से हरा दिया हो, लेकिन पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में पोलियो के नए मामले सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने कोई जोखिम न लेने का फैसला किया है। सीमावर्ती इलाकों और बड़े शहरों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है ताकि यह वायरस फिर से दस्तक न दे सके।
अभियान की मुख्य बातें
- लक्ष्य: प्रदेश भर में शून्य से पांच साल तक के 3.30 करोड़ बच्चों को दवा पिलाई जाएगी।
- टीम का गठन: स्वास्थ्य विभाग की हजारों टीमें घर-घर जाकर बच्चों को चिन्हित करेंगी और उन्हें सुरक्षित खुराक सुनिश्चित करेंगी।
- विशेष ध्यान: ईंट-भट्टों, झुग्गी-बस्तियों और प्रवासी आबादी वाले क्षेत्रों पर विभाग की पैनी नजर है।
मायने और प्रभाव: आम जनता पर क्या असर?
इस अभियान के मायने सिर्फ सरकारी खानापूर्ति नहीं, बल्कि हर घर की सुरक्षा है। पोलियो जैसी बीमारी का कोई इलाज नहीं है, इसलिए इसका एकमात्र बचाव ‘दो बूंद जिंदगी की’ ही है। जब हमारे पड़ोसी देशों में वायरस सक्रिय हो, तो एक भी बच्चा खुराक से छूट जाना भविष्य के लिए खतरा पैदा कर सकता है। एक जिम्मेदार नागरिक के तौर पर, अपने बच्चे को बूथ पर ले जाना या स्वास्थ्य टीम का सहयोग करना न भूलें। आपकी एक सक्रियता राज्य को पोलियो-मुक्त रखने के संकल्प को मजबूती देगी।



