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कानपुर में सांड़ का कहर: गन फैक्टरी कर्मी की दर्दनाक मौत, सब्जी मंडी में मच गई चीख-पुकार

कानपुर की सड़कों पर आवारा पशुओं का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। मंगलवार की शाम अरमापुर सब्जी मंडी में एक ऐसा मंजर दिखा जिसने हर किसी को झकझोर दिया। गन फैक्टरी के एक 55 वर्षीय कर्मचारी की सांड़ के हमले में जान चली गई। यह हादसा तब हुआ जब वे अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए सब्जी खरीदकर लौट रहे थे।

क्या है पूरा मामला?

मृतक की पहचान राम प्रसाद के रूप में हुई है, जो गन फैक्टरी में अस्थाई कर्मी के तौर पर कार्यरत थे। शाम के समय जब वे सब्जी मंडी से अपनी बाइक पर गुजर रहे थे, तभी एक आक्रामक सांड़ ने उन पर अचानक धावा बोल दिया। टक्कर इतनी भीषण थी कि राम प्रसाद बाइक से उछलकर सीधे सड़क किनारे लगे बिजली के खंभे से जा टकराए।

स्थानीय लोगों के अनुसार, उन्होंने सिर पर हेलमेट नहीं पहना था, जिसके कारण खंभे से टकराते ही उनके सिर में गंभीर चोट आई। उनके बेटे अजय आनन-फानन में उन्हें सर्वोदयनगर के एक निजी अस्पताल ले गए, लेकिन डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।

सब्जी मंडी बनी ‘डेथ ट्रैप’

अरमापुर मंडी में इस घटना के बाद लोगों का गुस्सा भड़क उठा है। रहवासियों का कहना है कि यहां आवारा जानवरों का जमावड़ा लगा रहता है, जिससे हर दिन राहगीर चोटिल हो रहे हैं। मंडी में बेतरतीब लगे जाम के कारण स्थिति और भी भयावह हो जाती है, जहाँ से निकलना किसी खतरे से कम नहीं है।

मायने और प्रभाव: आम जनता के लिए क्यों जरूरी है यह

  • प्रशासनिक लापरवाही: आवारा पशुओं की बढ़ती संख्या शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवालिया निशान है। यह घटना दिखाती है कि नगर निगम के तमाम दावों के बावजूद सड़कों पर जान का खतरा बना हुआ है।
  • सुरक्षा का सबक: राम प्रसाद की मौत हमें याद दिलाती है कि सड़क पर सुरक्षा के नियम केवल चालान से बचने के लिए नहीं, बल्कि खुद की जान बचाने के लिए अनिवार्य हैं। हेलमेट की उपयोगिता इस मामले में एक बार फिर स्पष्ट हो गई है।
  • आवाज उठाना जरूरी: अब समय आ गया है कि स्थानीय प्रशासन को इन बेसहारा पशुओं के स्थायी प्रबंधन के लिए मजबूर किया जाए, ताकि किसी और परिवार को अपना सदस्य न खोना पड़े।

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