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पत्नी की हत्या के बाद खुदकुशी: पूर्व विधायक के बेटे की डायरी से खुले कई राज, मचा हड़कंप

खुलासा: डायरी में दर्ज हैं कई नाम

आगरा के सुभाष तिराहा स्थित आवास पर हुई दर्दनाक घटना ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। पूर्व विधायक स्व. जगदीश सिंह यादव के बेटे राकेश यादव (73) द्वारा अपनी पत्नी राममूर्ति (68) की हत्या के बाद खुद को गोली मारने के मामले में अब एक नई कड़ी जुड़ गई है। घर से मिली एक डायरी ने पुलिस और प्रशासन के बीच हलचल मचा दी है।

क्या लिखा है डायरी में?

परिजनों के अनुसार, यह डायरी खुद राकेश यादव की है। इसमें उन्होंने अपने जीवन की अंतिम कुछ दिनों की आपबीती दर्ज की थी। सूत्रों की मानें तो डायरी के 6 से 7 पन्नों में राकेश यादव ने उन लोगों के नाम और करतूतों का जिक्र किया है, जिन्होंने उनका मानसिक उत्पीड़न किया था। हालांकि, परिवार के सदस्य फिलहाल इन नामों का खुलासा करने से बच रहे हैं, जिससे सस्पेंस और गहरा गया है।

कानूनी शिकंजे और बदनामी का दंश

राकेश यादव आदर्श कृष्ण इंटर कॉलेज के पूर्व प्रबंधक थे। मई 2025 में उनके खिलाफ कॉलेज की आय में गबन और फर्जीवाड़े का मुकदमा दर्ज हुआ था। बेटी गरिमा ने बताया कि जिस दिन यह घटना हुई, उसी दिन उनके पिता कोर्ट में तारीख से घर लौटे थे। कोर्ट की कार्यवाही और सामाजिक बदनामी के डर ने उन्हें गहरे अवसाद में धकेल दिया था। इसके अलावा, पत्नी राममूर्ति का कैंसर से लंबा संघर्ष भी इस परिवार के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ था।

राजनीतिक रसूख का इतिहास

राकेश यादव का परिवार क्षेत्र का बेहद प्रभावशाली राजनीतिक घराना रहा है। उनके पिता स्व. जगदीश सिंह यादव अस्सी के दशक में शिकोहाबाद से कांग्रेस के विधायक थे। राकेश यादव खुद भी ग्राम प्रधान रह चुके थे और उन्होंने 1991 व 1993 में मुलायम सिंह यादव जैसे दिग्गज के सामने विधानसभा चुनाव लड़ा था। आज उसी परिवार की यह दुखद परिणति चर्चा का विषय बनी है।

मायने और प्रभाव: आम जनता के लिए संदेश

यह मामला महज एक हत्या और खुदकुशी नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक प्रतिष्ठा के बीच फंसे व्यक्ति की दास्तां है। इसके प्रभाव समाज पर स्पष्ट हैं:

  • कानूनी लड़ाई का मानसिक बोझ: लंबे समय तक चलने वाले मुकदमे किसी भी इंसान को अंदर से तोड़ सकते हैं।
  • मानसिक स्वास्थ्य की उपेक्षा: अवसाद (Depression) कितनी खतरनाक स्थिति में ले जा सकता है, यह घटना उसका जीता-जागता प्रमाण है।
  • पारदर्शिता की जरूरत: डायरी का मिलना यह संकेत देता है कि अब पुलिस को उन लोगों की जांच करनी चाहिए, जिन्होंने राकेश यादव को कथित तौर पर उत्पीड़ित किया था।

क्या पुलिस अब डायरी में नामजद लोगों पर कार्रवाई करेगी? यह सवाल अब आगरा की जनता और कानूनी गलियारों में जोर-शोर से उठ रहा है।

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