कानपुर में साइबर अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्होंने एक रिटायर्ड बैंक मैनेजर को ही अपने जाल में फंसा लिया। डिजिटल अरेस्ट और निवेश के नाम पर हुई इस ठगी ने पूरे शहर में हड़कंप मचा दिया है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जाल बिछाया और अंततः एक आरोपी को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला जुलाई 2025 का है। पीड़ित बैंक मैनेजर को साइबर ठगों ने क्रिप्टो करेंसी में मोटा मुनाफा कमाने का लालच दिया था। ठगों ने एक महिला को मोहरा बनाया और बड़े ही शातिराना अंदाज में मैनेजर का विश्वास जीत लिया। देखते ही देखते उनसे अलग-अलग किश्तों में कुल 2.5 करोड़ रुपये ठग लिए गए।
जांच में सामने आया है कि ठगी गई रकम का एक बड़ा हिस्सा, करीब 45 लाख रुपये, सीधे गिरफ्तार किए गए आरोपी के बैंक खाते में ट्रांसफर किए गए थे। पुलिस अब उस पूरे नेटवर्क को खंगाल रही है, जिसके जरिए यह पैसा हवाला के जरिए इधर-उधर किया गया।
अन्य साथियों की तलाश तेज
कानपुर साइबर सेल की टीम अब मुख्य सरगना और बाकी साथियों की तलाश में जुटी है। गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ में कई चौंकाने वाले नाम सामने आए हैं। पुलिस का कहना है कि यह एक संगठित गिरोह है जो देशभर में लोगों को निशाना बना रहा है।
मायने और प्रभाव: आम जनता के लिए क्यों जरूरी है ये खबर?
यह घटना एक चेतावनी है कि साइबर अपराधी अब किसी को भी अपना शिकार बना सकते हैं। भले ही आप बैंकिंग क्षेत्र के विशेषज्ञ क्यों न हों, ऑनलाइन निवेश का प्रलोभन जानलेवा हो सकता है।
- सावधानी ही बचाव: किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर क्रिप्टो या शेयर बाजार में पैसा लगाने से बचें।
- KYC और वेरिफिकेशन: निवेश से पहले कंपनी और संबंधित व्यक्ति की विश्वसनीयता की जांच खुद करें।
- तुरंत रिपोर्ट करें: यदि आपके साथ कोई धोखाधड़ी होती है, तो देरी किए बिना नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर तुरंत कॉल करें।
कानपुर पुलिस का कहना है कि बाकी आरोपियों को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा और ठगी गई राशि की रिकवरी के लिए भी प्रयास जारी हैं।

