मथुरा के बांकेबिहारी मंदिर क्षेत्र की गलियों में श्रद्धालुओं की सुरक्षा अब सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गई है। हाल ही में मंदिर के पास एक पुराने मकान का छज्जा गिरने की घटना ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। इस हादसे के बाद मथुरा नगर निगम पूरी तरह एक्शन मोड में है और क्षेत्र के खतरनाक भवनों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।
69 मकान मालिक निशाने पर, समय सीमा तय
नगर निगम ने सर्वे के बाद इलाके के 69 ऐसे मकानों को चिह्नित किया है जो बेहद जर्जर हालत में हैं। इन मकानों का ढांचा कभी भी ढह सकता है, जिससे वहां से गुजरने वाले लाखों भक्तों की जान को खतरा बना हुआ है। निगम प्रशासन ने इन सभी भवन स्वामियों को औपचारिक नोटिस जारी कर दिया है।
अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि इन मकान मालिकों के पास सुधार कार्य शुरू करने या भवन खाली करने के लिए केवल तीन दिन का समय है। यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती है, तो प्रशासन सीधे कानूनी रास्ता अपनाते हुए संबंधित मालिकों के खिलाफ FIR दर्ज करेगा।

सुरक्षा से कोई समझौता नहीं
बांकेबिहारी मंदिर के आसपास का इलाका संकरी गलियों और पुरानी निर्माण शैली के लिए जाना जाता है। त्योहारों और वीकेंड पर यहां भारी भीड़ उमड़ती है, जिसे देखते हुए प्रशासन किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरतना चाहता। निगम की इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य किसी भी बड़े अनहोनी को होने से पहले रोकना है।
मायने और प्रभाव: आम जनता पर क्या होगा असर?
- सुरक्षा का वातावरण: इस कार्रवाई से उन लाखों भक्तों को राहत मिलेगी जो हर रोज दर्शन के लिए मथुरा आते हैं।
- कठोर रुख: प्रशासन द्वारा दी गई चेतावनी यह संदेश देती है कि पुरानी इमारतों के रख-रखाव में अब निजी स्वार्थ के बजाय सार्वजनिक सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी।
- आर्थिक जिम्मेदारी: जिन भवन मालिकों ने लंबे समय से अपने जर्जर मकानों की सुध नहीं ली है, अब उन्हें या तो मरम्मत का खर्च उठाना होगा या कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
यह कदम शहर के पुराने ढांचों को दुरुस्त करने की दिशा में एक बड़ी पहल है। नगर निगम की यह चेतावनी उन सभी लोगों के लिए एक सीख है जो अपनी जिम्मेदारी को दरकिनार कर रहे थे। अब देखना यह है कि तीन दिन बाद प्रशासन का अगला कदम क्या होता है।


