उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में एक बड़ा बदलाव किया है, जो सीधे तौर पर उन हजारों बेटियों से जुड़ा है जो इस योजना का लाभ उठा रही हैं। अब तक इन शादियों में दी जाने वाली पायल और बिछिया की खरीद सरकारी स्तर पर होती थी, लेकिन अब व्यवस्था बदल दी गई है।
उपहार की खरीदारी में अब नई व्यवस्था
सरकार ने निर्णय लिया है कि अब विवाह के दौरान उपहारों (पायल और बिछिया) की खरीद के लिए धनराशि सीधे दुल्हन के बैंक खाते में भेजी जाएगी। पहले इन सामानों की खरीद स्थानीय प्रशासन या संबंधित समितियों द्वारा की जाती थी, जिसमें गुणवत्ता और पसंद को लेकर अक्सर सवाल उठते थे।
इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ी वजह चांदी की बढ़ती कीमतें और खरीद प्रक्रिया में आने वाली व्यावहारिक दिक्कतें बताई जा रही हैं। चांदी के दामों में लगातार उतार-चढ़ाव के कारण टेंडर प्रक्रिया और क्वालिटी सुनिश्चित करना प्रशासन के लिए एक चुनौती बन गया था।
लाभार्थियों को होगा सीधा फायदा
- पसंद की आजादी: अब बेटियां अपनी पसंद और जरूरत के अनुसार पायल और बिछिया का चुनाव खुद कर सकेंगी।
- पारदर्शिता: सरकारी खरीद में होने वाली धांधली या घटिया क्वालिटी की शिकायतों पर पूरी तरह लगाम लगेगी।
- सीधा लाभ: डीबीटी (DBT) के माध्यम से पैसा खाते में आने से बीचौलियों की भूमिका खत्म हो जाएगी।
मायने और प्रभाव
सरकार का यह कदम न केवल प्रशासनिक जटिलताओं को कम करेगा, बल्कि योजना में पारदर्शिता को भी बढ़ाएगा। अक्सर सामूहिक विवाह में मिलने वाले उपहारों की गुणवत्ता को लेकर सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर शिकायतें आती रहती थीं। अब जब यह अधिकार दुल्हन के हाथ में होगा, तो वह अपने स्वाभिमान और जरूरत के अनुरूप खरीदारी कर पाएगी। यह बदलाव सरकारी योजनाओं के विकेंद्रीकरण की दिशा में एक बड़ा और स्वागत योग्य कदम है, जिससे लाभार्थियों का भरोसा बढ़ेगा।


