गोवर्धन की आस्था और भक्ति का केंद्र ‘मानसी गंगा’ शनिवार को मातम में बदल गई। सप्तकोसीय परिक्रमा पूरी करने के बाद पवित्र कुंड में डुबकी लगाने उतरे राजस्थान के दो किशोर गहरे पानी की भेंट चढ़ गए। इस दुखद घटना ने न केवल तीर्थ यात्रियों को झकझोर कर रख दिया है, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, राजस्थान से आए श्रद्धालुओं का एक जत्था गोवर्धन दर्शन के लिए पहुंचा था। लंबी परिक्रमा के बाद थकान मिटाने और पुण्य लाभ के लिए ये किशोर मानसी गंगा के घाट पर स्नान करने उतरे थे। इसी दौरान गहरे पानी में जाने से दोनों का संतुलन बिगड़ गया और वे डूबने लगे।
आसपास मौजूद लोगों ने बचाने की कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। गोताखोरों की मदद से एक किशोर को बाहर निकाला गया, लेकिन अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। दूसरे किशोर की तलाश अभी भी जारी है, जिसके चलते घाट पर तनाव और अफरातफरी का माहौल है।

सुरक्षा पर उठते सवाल
- गहरे पानी की चेतावनी: तीर्थ स्थलों पर अक्सर सुरक्षा संकेतों का अभाव देखने को मिलता है।
- गोताखोरों की तैनाती: भारी भीड़ वाले धार्मिक कुंडों पर आपातकालीन बचाव दल की कमी एक बड़ी चुनौती है।
- परिजनों का दर्द: अपनों को खोने वाले परिवारों के लिए यह यात्रा जीवन भर का दुख बन गई है।
मायने और प्रभाव
गोवर्धन जैसे प्रमुख तीर्थ स्थल पर हुई यह घटना प्रशासन के लिए एक वेक-अप कॉल है। हर साल लाखों श्रद्धालु यहाँ आते हैं, ऐसे में मानसी गंगा जैसे पवित्र कुंडों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम न होना दुर्भाग्यपूर्ण है। स्थानीय प्रशासन को अब घाटों पर बेरिकेडिंग और प्रशिक्षित लाइफगार्ड्स की तैनाती को प्राथमिकता देनी होगी ताकि आस्था के नाम पर कोई और परिवार अपने बच्चे को न खोए। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि समय रहते बचाव दल सक्रिय होता, तो शायद आज दूसरी जान भी बचाई जा सकती थी।



