अगर आप वृंदावन जाकर संत प्रेमानंद महाराज के दर्शन करने की योजना बना रहे हैं, तो रुकिए! सोशल मीडिया और डिजिटल दुनिया में सक्रिय साइबर ठगों ने अब आस्था को अपना नया हथियार बना लिया है। संत प्रेमानंद महाराज के नाम पर दर्शन कराने और उनसे मिलवाने का झांसा देकर देश भर के भक्तों से लाखों रुपये वसूले जा रहे हैं।
क्या है दर्शन के नाम पर चल रहा यह गोरखधंधा?
पिछले कुछ दिनों में वृंदावन के श्री हित राधा केली कुंज आश्रम को कई ऐसी शिकायतें मिली हैं, जिनमें बताया गया कि कुछ अनजान लोग खुद को महाराज का करीबी बताकर भक्तों से संपर्क कर रहे हैं। ये ठग विशेष दर्शन, पर्सनल मीटिंग, आश्रम में रहने की व्यवस्था और होटल बुकिंग के नाम पर ऑनलाइन पेमेंट की मांग करते हैं।
आश्रम प्रबंधन के मुताबिक, महाराज किसी भी तरह का निजी शुल्क नहीं लेते और न ही दर्शन के लिए किसी एजेंट की मदद ली जाती है। ठगों द्वारा भक्तों को फर्जी व्हाट्सएप नंबरों से मैसेज भेजे जा रहे हैं और एडवांस पेमेंट के लिए क्यूआर कोड (QR Code) भेजे जा रहे हैं।
शिष्यों की सख्त चेतावनी
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए महाराज के शिष्यों ने एक सार्वजनिक अपील जारी की है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि दर्शन का समय या कोई भी व्यवस्था आश्रम के आधिकारिक माध्यमों से ही होती है। किसी भी बाहरी व्यक्ति या वेबसाइट पर भरोसा करना आपके लिए भारी पड़ सकता है।
- सावधान रहें: किसी भी अनजान व्यक्ति को दर्शन के नाम पर पैसे न दें।
- वेरिफिकेशन जरूरी: आश्रम से जुड़ी किसी भी सेवा के लिए केवल आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल और वेबसाइट का उपयोग करें।
- साइबर क्राइम को रिपोर्ट करें: यदि आपके साथ कोई ठगी की कोशिश हुई है, तो तुरंत नजदीकी थाने या साइबर सेल में सूचना दें।
मायने और प्रभाव: आस्था के नाम पर बड़ा खतरा
यह मामला केवल एक धोखाधड़ी का नहीं है, बल्कि यह उन लाखों भक्तों के भरोसे को तोड़ने की कोशिश है जो अपनी श्रद्धा लेकर वृंदावन पहुंचते हैं। जब आस्था को व्यापार बना दिया जाता है, तो असली श्रद्धालुओं का विश्वास डगमगाने लगता है। वृंदावन जैसे धार्मिक स्थलों पर ऐसी घटनाएं न केवल सुरक्षा के लिए सवाल खड़ी करती हैं, बल्कि डिजिटल साक्षरता की कमी का फायदा उठाकर आम आदमी की मेहनत की कमाई को निशाना बना रही हैं। भविष्य में ऐसी ठगी से बचने के लिए सतर्कता ही एकमात्र उपाय है।




