सुरक्षा में भारी चूक: बाल गृह से कैसे गायब हुई किशोरी?
वृंदावन के राजकीय बाल गृह से एक किशोरी के रहस्यमयी तरीके से भागने की घटना ने प्रशासन के कान खड़े कर दिए हैं। बीते नौ महीनों में यह चौथी बार है जब बाल गृह की सुरक्षा व्यवस्था तार-तार हुई है और कोई किशोरी वहां से निकलने में कामयाब रही। किशोरी के भागने के दूसरे दिन भी पुलिस के हाथ कोई पुख्ता सुराग नहीं लगा है, जिससे बाल गृह की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
तीन टीमों के भरोसे तलाश
घटना की गंभीरता को देखते हुए मथुरा पुलिस ने किशोरी की तलाश के लिए तीन अलग-अलग टीमें गठित की हैं। पुलिस आसपास के सीसीटीवी कैमरों को खंगाल रही है और उन रास्तों की जांच की जा रही है जिनका इस्तेमाल किशोरी ने किया हो सकता है। फिलहाल, पूरी घटना पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है।
अब 24 घंटे तैनात रहेगी पुलिस
बार-बार हो रही इन घटनाओं के बाद शासन ने सुरक्षा में बदलाव का बड़ा निर्णय लिया है। अब राजकीय बाल गृह में एक अस्थायी पुलिस चौकी बनाई जाएगी। इसके अलावा, वहां सुरक्षा के लिहाज से:

- तीन शिफ्टों में पुलिस बल की तैनाती होगी।
- 24 घंटे पहरेदारी सुनिश्चित की जाएगी।
- बाल गृह के भीतर और बाहर निगरानी बढ़ाई जाएगी।
मायने और प्रभाव: आम जनता के लिए क्यों जरूरी है यह खबर?
वृंदावन जैसे आध्यात्मिक और सुरक्षित माने जाने वाले शहर में बाल गृहों की यह स्थिति चिंताजनक है। बाल गृह उन बच्चों के लिए एक ‘सुरक्षित आशियाना’ होना चाहिए जिन्हें समाज और परिवार के सहयोग की सबसे ज्यादा जरूरत है। यदि यहां रहने वाली किशोरियां ही खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रही हैं या प्रशासन उनकी सुरक्षा में नाकाम साबित हो रहा है, तो यह हमारे सिस्टम की एक बड़ी खामी है। भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए केवल पुलिस चौकी बनाना काफी नहीं है, बल्कि बाल गृहों के प्रबंधन और वहां की आंतरिक कार्यप्रणाली की भी कड़ी जांच जरूरी है।




