आगरा की फतेहाबाद विधानसभा के लोकप्रिय जननेता और भाजपा विधायक छोटेलाल वर्मा अब हमारे बीच नहीं रहे। शुक्रवार को उनके पैतृक गांव नगला देवहंस में नम आंखों और भारी मन से उन्हें पंचतत्व में विलीन कर दिया गया। अंतिम यात्रा में उमड़े जनसैलाब ने यह साबित कर दिया कि वे सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि जनता के ‘बाबूजी’ थे।
अंतिम यात्रा: अपार भीड़ और गमगीन माहौल
गुरुवार शाम नोएडा के एक अस्पताल में अंतिम सांस लेने के बाद, शुक्रवार सुबह उनका पार्थिव शरीर आगरा स्थित उनके आवास पर लाया गया। जैसे ही विधायक का पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए रखा गया, उनके समर्थकों का तांता लग गया। सुबह 11 बजे जब उनकी शव यात्रा पैतृक गांव नगला देवहंस के लिए निकली, तो आगरा-फतेहाबाद मार्ग पर हजारों लोगों की भीड़ जमा हो गई।
सांसद राजकुमार चाहर हुए भावुक
इस अंतिम विदाई के दौरान सांसद राजकुमार चाहर काफी भावुक नजर आए। उन्होंने बेहद दुखी मन से कहा, ‘मैंने अपना एक बाजू खो दिया है। वे नाम से छोटे थे, लेकिन उनके काम और व्यक्तित्व बहुत विशाल थे।’ सांसद ने बताया कि किस तरह छोटेलाल वर्मा ने जमीन से जुड़कर लोकसभा चुनाव में पार्टी की जीत के लिए जी-जान लगा दी थी।
मायने और प्रभाव
छोटेलाल वर्मा का जाना आगरा और विशेषकर फतेहाबाद क्षेत्र के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उनके निधन के मायने इस प्रकार हैं:
- जन-नेता की पहचान: उनका चार बार विधायक चुना जाना और अंतिम यात्रा में उमड़ी भीड़ यह दर्शाती है कि वे जनता के बीच कितने सहज और उपलब्ध थे।
- राजनीतिक रिक्तता: एक ऐसे नेता का जाना जो हर वर्ग की समस्याओं को सीधे सुनता था, क्षेत्र की राजनीति में एक बड़ा शून्य छोड़ गया है।
- भावनात्मक जुड़ाव: छतों से महिलाओं द्वारा पुष्पवर्षा और ग्रामीणों की आंखों में आंसू यह बताते हैं कि उन्होंने राजनीति से परे जाकर लोगों के दिलों में अपनी जगह बनाई थी।
अंतिम संस्कार के दौरान पुलिस की सलामी के बाद उनके सबसे छोटे पुत्र महेंद्र वर्मा ने मुखाग्नि दी। फतेहाबाद क्षेत्र में आज सन्नाटा पसरा है, क्योंकि लोगों का मानना है कि ‘बाबूजी’ जैसा सरल और मिलनसार नेता दोबारा मिलना मुश्किल है।





