मेरठ की पुलिस व्यवस्था में उस समय खलबली मच गई जब किसान नेता दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव द्वारा लगाए गए संगीन आरोपों के बाद सिविल लाइन थाना प्रभारी अखिलेश गौड़ के खिलाफ गाज गिरी। एसएसपी बीबीजीटीएस मूर्ति ने मामले की गंभीरता को देखते हुए देर रात इंस्पेक्टर अखिलेश गौड़ को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया है।
क्या है पूरा मामला?
किसान नेता दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव ने तत्कालीन एसएसपी अविनाश पांडेय पर गंभीर मारपीट और सिविल लाइन थाना प्रभारी अखिलेश गौड़ पर हिरासत में अमानवीय यातनाएं देने का आरोप लगाया था। इस मामले ने तूल तब पकड़ा जब पीड़ित पक्ष ने न्याय की गुहार लगाते हुए वरिष्ठ अधिकारियों के दरवाजे खटखटाए।
आरोपों के बाद प्रशासनिक स्तर पर हड़कंप मच गया और मामले की जांच अब सहारनपुर डीआईजी के नेतृत्व में चल रही है। एडीजी के स्पष्ट आदेश के बाद पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों के बीच यह बड़ी कार्रवाई सामने आई है।
प्रशासनिक फेरबदल और जांच का दायरा
पुलिस लाइन में आमद दर्ज कराते ही अखिलेश गौड़ को थाने से हटा दिया गया है। विभागीय सूत्रों की मानें तो जांच प्रक्रिया निष्पक्ष रखने के लिए यह कदम उठाया गया है ताकि पीड़ित पक्ष को न्याय मिल सके और पुलिस की छवि पर आंच न आए।
- मुख्य आरोपी: सिविल लाइन थाना प्रभारी अखिलेश गौड़
- जांच अधिकारी: सहारनपुर डीआईजी
- आरोप: हिरासत में मारपीट और अमानवीय व्यवहार
मायने और प्रभाव
यह कार्रवाई इस बात का स्पष्ट संकेत है कि अब खाकी पर उठने वाले सवालों को विभाग नजरअंदाज नहीं कर रहा है। मेरठ में किसी बड़े अधिकारी के खिलाफ इस तरह की त्वरित कार्रवाई जनता के बीच पुलिस की जवाबदेही तय करने का एक संदेश है। यदि जांच में आरोप सिद्ध होते हैं, तो यह न केवल संबंधित पुलिसकर्मियों के करियर के लिए बल्कि विभाग की आंतरिक कार्यशैली में बड़े सुधार का कारण भी बन सकता है।




