खुशियों के बीच मातम: मंदिर जा रही महिला ने तोड़ा दम
बरेली के गुलड़िया इलाके में एक दुखद घटना ने हर किसी को सन्न कर दिया है। मंदिर में जलाभिषेक के लिए उत्साह के साथ निकली एक महिला की अचानक मौत हो गई। चश्मदीदों और परिजनों का कहना है कि मौत का कारण कोई बीमारी नहीं, बल्कि पास में बज रहे डीजे की कानफोड़ू आवाज थी।
घटना उस वक्त हुई जब महिला सड़क से गुजर रही थी। तेज म्यूजिक की धमक इतनी अधिक थी कि महिला अचानक सड़क किनारे बैठ गई। परिजनों के अनुसार, उन्होंने सीने में बेचैनी की शिकायत की थी और कुछ ही पलों में उन्होंने दम तोड़ दिया।
क्या तेज आवाज जानलेवा हो सकती है?
गुलड़िया के स्थानीय लोगों के मुताबिक, इलाके में तेज आवाज में डीजे बजाना एक आम समस्या बन चुकी है। महिला की मौत के बाद परिवार में कोहराम मचा है। हालांकि, शोक में डूबे परिजनों ने शव का पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया है, लेकिन यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या हम मनोरंजन के नाम पर जानलेवा शोर को बढ़ावा दे रहे हैं?
- सीधे दिल पर असर: तेज आवाज और डीजे की ‘बीट’ ब्लड प्रेशर को अचानक बढ़ा सकती है।
- हार्ट पेशेंट के लिए खतरा: बुजुर्गों और पहले से हृदय रोगी लोगों के लिए तेज ध्वनि का झटका जानलेवा साबित हो सकता है।
- ध्वनि प्रदूषण: प्रशासन के नियमों के बावजूद तेज डीजे का चलन अभी भी बेरोकटोक जारी है।
मायने और प्रभाव: हम कब जागेंगे?
बरेली की यह घटना केवल एक परिवार का निजी नुकसान नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज में बढ़ते ध्वनि प्रदूषण की चेतावनी है। डीजे की तेज धमक का सीधा असर हमारे हृदय और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। यह घटना आईना दिखाती है कि कैसे सार्वजनिक स्थानों पर बिना नियंत्रण के बजने वाले लाउडस्पीकर किसी की जान ले सकते हैं।
प्रशासन को अब सड़कों पर बजने वाले इन ‘तेज शोर’ के प्रति सख्त रुख अपनाना होगा। त्यौहारों और आयोजनों की आड़ में होने वाला ध्वनि प्रदूषण अब आम नागरिकों के लिए खतरनाक साबित हो रहा है। हमें समझना होगा कि उत्सव दूसरों के जीवन पर भारी नहीं पड़ना चाहिए।




