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जेन-जी का दम: अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में 18 दिन के छात्र आंदोलन की जीत, प्रॉक्टर नवेद हटाए गए

छात्र शक्ति के आगे झुका प्रशासन

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) के परिसर में पिछले 18 दिनों से चल रही तपिश का असर आखिरकार दिखाई दे गया है। छात्र संघ चुनाव बहाली की मांग को लेकर अड़े छात्रों के आंदोलन ने प्रशासनिक ढांचे को हिला दिया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने बड़ा फैसला लेते हुए प्रॉक्टर नवेद खान को उनके पद से हटा दिया है।

लंबे समय से परिसर में शांत दिख रही छात्र राजनीति ने एक बार फिर करवट ली है। छात्रों के इस शांतिपूर्ण लेकिन दृढ़ प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया है कि आज की ‘जेन-जी’ पीढ़ी अपनी मांगों के प्रति बेहद जागरूक है और इसे दबाना अब आसान नहीं है।

क्या है पूरा मामला?

एएमयू कैंपस में बीते कई दिनों से छात्र छात्र संघ चुनाव कराने की मांग को लेकर भूख हड़ताल और धरना प्रदर्शन कर रहे थे। छात्रों का आरोप था कि विश्वविद्यालय प्रशासन उनकी लोकतांत्रिक आवाजों को अनसुना कर रहा है। इस खींचतान के बीच प्रॉक्टर पर छात्रों के साथ सख्ती बरतने के आरोप भी लग रहे थे।

  • आंदोलन का 19वां दिन: प्रशासन ने प्रोफेसर मो. नफीस अहमद अंसारी को नया प्रॉक्टर नियुक्त किया है।
  • छात्रों का स्टैंड: चुनाव बहाल होने तक प्रदर्शन जारी रखने की चेतावनी।
  • परिसर का माहौल: प्रशासनिक बदलाव के बाद भी छात्रों में अभी भी आक्रोश है।

मायने और प्रभाव: छात्रों की जीत या नई शुरुआत?

इस पूरे घटनाक्रम के मायने बहुत गहरे हैं। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी जैसे ऐतिहासिक संस्थान में प्रॉक्टर का बदला जाना केवल एक प्रशासनिक फेरबदल नहीं है, बल्कि यह छात्रों के उस ‘पावर प्रेशर’ का नतीजा है जिसे जंतर-मंतर से लेकर देश के अन्य परिसरों में भी महसूस किया गया है।

स्थानीय छात्रों के लिए यह एक बड़ी जीत है क्योंकि उनका अनुशासन और लगातार डटे रहने का जज्बा रंग लाया है। हालांकि, प्रशासन के सामने अब असली चुनौती छात्र संघ चुनाव की तारीखों का ऐलान करना है। अगर प्रशासन ने अब भी देरी की, तो यह आंदोलन और भी बड़े रूप में सामने आ सकता है। आने वाले दिन अलीगढ़ की सियासत और शिक्षा जगत के लिए काफी अहम रहने वाले हैं।

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