गोरखपुर के भटहट-बांसस्थान मार्ग पर एक ऐसी अमानवीय घटना सामने आई है जिसने सुरक्षा व्यवस्था और मानवीय संवेदनाओं पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। निर्माण कार्य में लगी लापरवाही की पराकाष्ठा यह रही कि एक थके-हारे मजदूर को डिवाइडर पर सोते हुए मिट्टी के ढेर के नीचे दबा दिया गया, जिससे उसकी दम घुटने से मौत हो गई।
क्या है पूरा मामला?
बुधवार देर रात भटहट-बांसस्थान फोरलेन निर्माण के दौरान मिट्टी डालने का काम चल रहा था। देवरिया निवासी मिंटू, जो पिछले कई वर्षों से यहाँ मजदूरी कर रहा था, दिनभर की थकान के बाद डिवाइडर पर ही सो गया था। डंपर चालक ने बिना यह देखे कि वहां कोई मौजूद है, पूरी मिट्टी उस पर पलट दी।
अगली सुबह जब जेसीबी से मिट्टी समतल की जा रही थी, तब ऑपरेटर को एक पैर बाहर दिखाई दिया। आनन-फानन में मिट्टी हटाई गई तो अंदर शव दबा हुआ मिला, जिसे देखकर मौके पर मौजूद लोगों के रोंगटे खड़े हो गए। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
प्रशासन की कार्रवाई और सियासत
इस मामले में पुलिस ने लापरवाही बरतने वाले डंपर चालक रंजू राजभर को गिरफ्तार कर लिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी सिटी निमिष पाटील ने कहा कि चालक की बड़ी लापरवाही सामने आई है। वहीं, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने इस घटना पर दुख जताते हुए सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि ‘संवेदनाएं मर चुकी हैं और मिट्टी में इंसानियत दब गई है।’
मायने और प्रभाव: आम जनता के लिए क्यों जरूरी है यह खबर?
- सुरक्षा मानकों का अभाव: यह घटना दिखाती है कि बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा को लेकर निर्माण कंपनियां कितनी लापरवाह हैं। क्या रात के वक्त कार्यस्थल पर सुपरविजन की कोई व्यवस्था नहीं थी?
- मानवीय संवेदनाओं का पतन: एक इंसान को बिना देखे मिट्टी के नीचे दबा देना यह दर्शाता है कि निर्माण साइटों पर बुनियादी सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन नहीं हो रहा है।
- परिवार पर कहर: मिंटू की मौत से उसके दो बच्चों और पत्नी के सिर से साया उठ गया है। अब सवाल यह है कि क्या उसे न्याय मिलेगा या फिर यह मामला फाइलों में दबकर रह जाएगा।




