कुशीनगर के कप्तानगंज थाना क्षेत्र से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने रिश्तों की मर्यादा और मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। एक कलयुगी पति ने सिर्फ इसलिए अपनी पत्नी की निर्मम हत्या कर दी क्योंकि उसने उसके नशे की लत का विरोध किया था। पडरौना स्थित अपर सत्र न्यायाधीश (FTC-प्रथम) की अदालत ने इस मामले में त्वरित सुनवाई करते हुए आरोपी पति को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
नशे की लत बनी मौत का कारण
घटना कप्तानगंज के ग्राम बनकटा की है। आरोपी संजय प्रसाद का अपनी पत्नी प्रमिला देवी से अक्सर विवाद होता था, जिसकी मुख्य वजह संजय की नशे की आदत थी। घटना वाली रात भी जब संजय नशे में धुत होकर घर पहुँचा, तो दोनों के बीच तीखी बहस हुई। प्रमिला देवी अपने 14 वर्षीय बेटे सत्यम के साथ घर की व्यवस्था में जुटी थी, तभी संजय ने गुस्से में आकर कुदाल से उसके सिर पर जानलेवा हमला कर दिया।
बेटे की गुहार भी नहीं पिघला सकी पिता का दिल
हमले के वक्त प्रमिला का 14 वर्षीय बेटा सत्यम वहीं मौजूद था। वह अपने पिता के पैर पकड़कर रोता रहा और अपनी मां को बचाने की भीख मांगता रहा। लेकिन आरोपी संजय पर हैवानियत इस कदर हावी थी कि उसने अपने बेटे की चीख-पुकार को भी अनसुना कर दिया। प्रमिला को गंभीर हालत में गोरखपुर मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहाँ इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
अदालत की सख्त टिप्पणी
न्यायाधीश सत्यपाल सिंह प्रेमी ने इस केस में बेहद सख्त रुख अपनाते हुए कहा, ‘अभियुक्त का कृत्य जघन्य है। जिस तरह उसने अपने ही बच्चे के सामने अपनी पत्नी की जान ली और बच्चे की गुहार को अनसुना किया, वह समाज के लिए एक बड़ा कलंक है।’ कोर्ट ने इस बात को गंभीरता से लिया कि इस वारदात का उस मासूम बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य पर क्या गहरा असर पड़ा होगा।
मायने और प्रभाव: समाज के लिए सबक
यह फैसला सिर्फ एक सजा नहीं, बल्कि समाज के लिए एक चेतावनी भी है। इसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- न्यायिक त्वरित न्याय: समय पर ठोस सबूतों के आधार पर अदालत का यह फैसला समाज में कानून का डर कायम रखने के लिए जरूरी है।
- नशे का दंश: यह घटना दिखाती है कि नशे की लत न केवल व्यक्ति को बर्बाद करती है, बल्कि पूरे परिवार को तबाह कर देती है।
- घरेलू हिंसा के प्रति संवेदनशीलता: यह मामला याद दिलाता है कि घरेलू कलह को हल्के में नहीं लेना चाहिए, क्योंकि यह कब जानलेवा बन जाए, कहा नहीं जा सकता।
अदालत ने दोषी संजय प्रसाद पर 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना न भरने की स्थिति में उसे अतिरिक्त 5 महीने की जेल काटनी होगी। दोषी को तत्काल प्रभाव से जिला कारागार, देवरिया भेज दिया गया है।




