कानपुर के उर्सला अस्पताल में होमगार्ड भर्ती मेडिकल जांच के दौरान हुई रिश्वतखोरी ने पूरे महकमे में हड़कंप मचा दिया है। खाकी की वर्दी के लिए हो रहे खेल में जब डॉक्टरों के नाम सामने आए, तो अस्पताल प्रशासन की साख पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। अब इस मामले में अस्पताल की निदेशक डॉ. सीमा श्रीवास्तव ने सीधे शासन को अपनी विस्तृत रिपोर्ट भेज दी है, जिसके बाद दोषियों पर कड़ी कार्रवाई के संकेत मिले हैं।
क्या है पूरा मामला?
शनिवार को उर्सला अस्पताल के ईएनटी विभाग में तैनात डॉ. प्रवीण और डॉ. महेश पर होमगार्ड भर्ती के लिए रिश्वत लेने का आरोप लगा था। इन पर आरोप है कि उन्होंने मेडिकल जांच को प्रभावित करने की कोशिश की। हैरान करने वाली बात यह है कि जब मामले ने तूल पकड़ा, तो आरोपियों को बचाने के लिए अस्पताल के भीतर ही ‘लीपापोती’ की कोशिशें शुरू हो गई थीं।
अस्पताल के अंदर डॉक्टरों में फूट
इस पूरे घटनाक्रम के बाद रविवार को उर्सला अस्पताल के डॉक्टरों के बीच दो गुट नजर आए। एक तरफ वे डॉक्टर थे जो इस भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं और दूसरी तरफ वे जो पूरी घटना को दबाने की फिराक में थे। सूत्रों की मानें तो आरोपी डॉक्टरों की एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड और ईसीजी रिपोर्ट सामान्य होने के बावजूद उन्हें रेफर करने में देरी की गई, ताकि उन्हें बचाया जा सके। हालांकि, बाद में उन्हें हैलट और कार्डियोलॉजी अस्पताल भेजकर अंततः जेल भेज दिया गया।
मायने और प्रभाव
- प्रशासन की सख्ती: निदेशक द्वारा सीधे शासन को रिपोर्ट भेजने से साफ है कि सरकार इस मामले में किसी भी स्तर पर नरमी बरतने के मूड में नहीं है।
- अन्य लोगों पर लटकी तलवार: इस रिपोर्ट के आधार पर अस्पताल के उन अन्य कर्मचारियों और अधिकारियों पर भी गाज गिर सकती है, जिन्होंने इस रिश्वतखोरी के खेल में आरोपियों की मदद की थी।
- पारदर्शिता की मांग: यह मामला एक बड़ा सबक है कि भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता कितनी जरूरी है। कानपुर के आम नागरिकों के मन में अब सरकारी अस्पताल की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठने लगे हैं, जिसे बहाल करने के लिए दोषियों पर सख्त कार्रवाई बेहद जरूरी है।


