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कानपुर: सीएम योगी को भेंट की माटी कला और IIT का अनोखा संगम, क्या है इस गुल्लक के पीछे की कहानी?

जब कानपुर की माटी और IIT की तकनीकी का हुआ मेल

कानपुर में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक बेहद खास और अनूठी भेंट दी गई। सीएसए (CSA) में आयोजित कार्यशाला के मंच पर जब जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने सीएम योगी को मिट्टी की गुल्लक सौंपी, तो वहां मौजूद हर शख्स की नजरें उसी पर टिक गईं। यह गुल्लक साधारण नहीं थी, बल्कि इसे बिठूर के माटी कला कारीगरों की मेहनत और आईआईटी (IIT) कानपुर की आधुनिक सोच के मेल से तैयार किया गया था।

न सिर्फ गुल्लक, बल्कि विरासत का भी सम्मान

इस कार्यक्रम में केवल मिट्टी की गुल्लक ही नहीं, बल्कि कलाकार रंजीत सिंह द्वारा विशेष रूप से तैयार किया गया एक ताम्र चित्र भी मुख्यमंत्री को भेंट किया गया। कार्यक्रम के दौरान कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने भी मुख्यमंत्री को गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत द्वारा लिखित ‘प्राकृतिक खेती’ पर आधारित पुस्तक भेंट की। यह क्षण प्रदेश में स्थानीय कारीगरों को प्रोत्साहित करने और उन्हें वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने की सरकारी प्राथमिकता को दर्शाता है।

किसकी रही मौजूदगी?

इस अवसर पर प्रदेश सरकार के कई वरिष्ठ मंत्री और अधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से ये हस्तियां शामिल थीं:

  • उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय और खादी ग्रामोद्योग मंत्री राकेश सचान।
  • कृषि राज्य मंत्री बलदेव सिंह औलख और राज्य मंत्री प्रतिभा शुक्ला।
  • सांसद रमेश अवस्थी और कानपुर की महापौर प्रमिला पांडेय।
  • शहर के तमाम विधायक और प्रशासनिक अधिकारी, जिनमें पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल और जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह प्रमुख रहे।

मायने और प्रभाव: आम जनता के लिए क्यों है यह जरूरी?

इस भेंट के गहरे राजनीतिक और आर्थिक मायने हैं। पहली बात, आईआईटी कानपुर जैसे प्रतिष्ठित संस्थान का स्थानीय माटी कला कारीगरों के साथ जुड़ना यह बताता है कि सरकार अब ‘लोकल फॉर वोकल’ को तकनीकी समर्थन देने के मूड में है।

दूसरी बात, बिठूर के कारीगरों की कला को राज्य स्तर पर प्रमोट करना स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा बूस्ट है। यह दर्शाता है कि कानपुर की परंपरागत शिल्पकला अब आधुनिक दौर के साथ कदम मिलाकर चल रही है। आम जनता के लिए इसका संदेश साफ है—यदि स्थानीय उत्पादों को तकनीक और प्रोत्साहन मिले, तो वे भी मुख्यमंत्री और बड़े मंचों तक अपनी पहचान बना सकते हैं।

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