कानपुर में अक्टूबर का महीना एक बार फिर अपने मिजाज को लेकर चर्चा में है। पिछले छह वर्षों से लगातार अक्टूबर में बरस रहे बादल अब शहरवासियों की चिंता और कौतूहल का विषय बन गए हैं। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस साल भी अक्टूबर में बारिश का दौर जारी है, जिससे मौसम चक्र में आए बड़े बदलावों की पुष्टि होती है।
लगातार छह साल से बारिश का ट्रेंड
चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (CSA) के मौसम विभाग की रिपोर्ट चौंकाने वाली है। साल 2021 से लगातार हर अक्टूबर में कानपुर में बारिश दर्ज की जा रही है। जबकि इतिहास गवाह है कि पिछले 55 वर्षों में 17 बार ऐसा भी हुआ है जब अक्टूबर का महीना पूरी तरह सूखा यानी शून्य बारिश वाला रहा था।
मौसम बदलने के पीछे क्या है कारण?
मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि यह सब ‘क्लाइमेट चेंज’ यानी जलवायु परिवर्तन का स्पष्ट असर है। नोडल अधिकारी अजय मिश्रा के अनुसार, अब बारिश का समय आगे खिसक रहा है और ‘पॉकेट रेन’ की घटनाएं बढ़ गई हैं। इसका मतलब है कि बारिश की कुल मात्रा भले ही वैसी हो, लेकिन वह बहुत कम समय में एक ही स्थान पर केंद्रित हो जाती है, जो पर्यावरण के नए संतुलन की ओर इशारा है।
दो दिन और भीग सकता है कानपुर
फिलहाल, बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव और पश्चिमी विक्षोभ के चलते अगले 48 घंटों तक शहर में हल्की बूंदाबांदी के आसार बने हुए हैं। पुरवा और पछुवा हवाओं के टकराव से आसमान में घने बादल छाए रहेंगे। हालांकि, यह बारिश भारी नहीं होगी, लेकिन यह तापमान में बड़ी गिरावट लाने के लिए काफी है।
मायने और प्रभाव: आम जनता के लिए क्या है संकेत?
मौसम में हो रहे इस बदलाव का सीधा असर शहर के तापमान और आपकी दिनचर्या पर पड़ेगा:
- ठंड की दस्तक: पारे में गिरावट के साथ ही अब सुबह-शाम गुलाबी ठंड का अहसास तेज हो जाएगा। अधिकतम तापमान में 2-3 डिग्री की कमी दर्ज की गई है, जो सर्दियों के आगमन की आहट है।
- स्वास्थ्य पर असर: मौसम के इस उतार-चढ़ाव में मौसमी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए सावधानी जरूरी है।
- कृषि पर प्रभाव: वर्षा चक्र के आगे खिसकने से फसल चक्र और बुवाई के पारंपरिक समय पर भी असर पड़ रहा है, जो स्थानीय किसानों के लिए एक चुनौतीपूर्ण संकेत है।
कानपुर के लोगों को अब अपने गर्म कपड़ों को बाहर निकालने के लिए तैयार रहना चाहिए, क्योंकि आने वाले दिनों में पारा और नीचे जाने की पूरी संभावना है।



