अगर आप कानपुर में किसी सरकारी काम के लिए परेशान हैं और आपकी शिकायतें सुनी नहीं जा रही हैं, तो यह खबर आपके लिए राहत भरी हो सकती है। योगी सरकार के ‘इंटीग्रेटेड ग्रीवेंस रिड्रेसल सिस्टम’ (IGRS) पर शिकायतों के निपटारे में लापरवाही बरतने वाले नौ विभागों के अफसरों पर अब प्रशासन का चाबुक चला है।
क्यों गिर गई कानपुर की रैंकिंग?
सितंबर महीने की आईजीआरएस रैंकिंग में कानपुर जिले का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा है, और शहर फिसलकर 71वें पायदान पर आ गया है। एडीएम सिटी सौरभ सिंह ने इस खराब प्रदर्शन को गंभीरता से लेते हुए लापरवाही बरतने वाले विभागों को नोटिस जारी किया है।
समीक्षा बैठक में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि कई जांच अधिकारी शिकायतकर्ता से संपर्क तक नहीं कर रहे हैं। बिना फरियादी का पक्ष सुने ही शिकायतों का निपटारा किया जा रहा था, जिसके कारण जनता का फीडबैक बेहद नकारात्मक मिल रहा है।
इन विभागों को थमाया गया नोटिस
प्रशासन की सख्ती के बाद जिन नौ विभागों से जवाब तलब किया गया है, उनमें शामिल हैं:
- केस्को (आईजीआरएस सेल)
- जिला पूर्ति अधिकारी
- एसडीएम घाटमपुर
- नगर निगम (नोडल अधिकारी)
- एसीएम-5
- औषधि निरीक्षक (खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन)
- बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए)
- उप श्रमायुक्त कानपुर नगर
मायने और प्रभाव: आम जनता के लिए क्या है खास?
जवाबदेही तय होना: आईजीआरएस शासन की वह कड़ी है जहां आम आदमी अपनी बात सीधे सरकार तक पहुंचाता है। जब रैंक गिरती है, तो इसका सीधा मतलब है कि स्थानीय स्तर पर अधिकारी जनता की समस्याओं को नजरअंदाज कर रहे हैं।
सुधार की उम्मीद: प्रशासन द्वारा अधिकारियों पर कार्रवाई और जवाब मांगने का सीधा असर अब फाइलों के निपटारे पर पड़ेगा। भविष्य में अधिकारियों को बिना शिकायतकर्ता के फीडबैक के फाइल बंद करने से पहले दो बार सोचना पड़ेगा।
प्रशासनिक कसावट: इस नोटिस के बाद उम्मीद है कि कानपुर के इन सरकारी दफ्तरों में कामकाज की गति बढ़ेगी और जो आम जनता अपनी छोटी-छोटी समस्याओं के लिए हफ्तों से दफ्तरों के चक्कर काट रही है, उन्हें राहत मिलेगी।



